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एकादशी व्रत का क्या महत्व होता है और इसको करने की विधि और इसको करने से जीवन में फायदे क्या है ?

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अथ ॥ एकादशी व्रत माहात्म्य-कथा भाषा ॥ श्रीसूत जी महाराज शौनक आदि अट्ठासी हजार ऋषियों से बोले- हे महर्षियो! एक वर्ष के अन्दर बारह महीने होते हैं और एक महीने में दो एकादशी होती हैं। सो एक वर्ष में चौबीस एकादशी होती हैं। जिस वर्ष लौंद ( अधिक) पड़ता है उस वर्ष दो एकादशी बढ़ जाती हैं। इस तरह कुल छब्बीस एकादशी होती हैं। १. उत्पन्ना, २. मोक्षदा, ( मोक्ष प्रदान करने वाली), ३. सफला (सफलता देने वाली), ४. पुत्रदा (पुत्र को देने वाली), ५. षट्तिला, ६. जया, ७. विजया, ८. आमलकी, ९. पाप मोचनी (पापों को • नष्ट करने वाली), १०. कामदा, ११. बरूथनी, १२. मोहिनी, १३. अपरा, १४. निर्जला, १५. योगिनी, १६. देवशयनी, १७. कामिदा, १८. पुत्रदा, १९. अजा, २०. परिवर्तिनी, २१. इन्द्रर, २२. पाशांकुशा, २३. रमा, २४. देवोत्यानी। लौंद (अधिक) की दोनों एकादशियों का नाम क्रमानुसार पद्मिनी और परमा है। ये सब एकादशी यथा नाम तथा गुण वाली हैं। इन एकादशियों के नाम तथा गुण उनके व्रत की कथा सुनने से मालूम होंगे। जो मनुष्य इन एकादशियों के व्रत को शास्त्रानुसार करते हैं उन्हें उसी के फल की प्राप्ति होती है। नैमिषारण्य क्षेत्र में श्रीसूतजी ब

पापांकुशा एकादशी महात्म्य कथा | पाशांकुश एकादशी महात्म्य | Papankusha Ekadashi Vrat Katha

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 ॥ अथ पाशांकुशा एकादशी माहात्म्य ॥ प्रिय भक्तों पुराणों में बहुत से व्रतों का विस्तार पूर्वक वर्णन मिलता है जिनको करने से मनुष्य अपने कल्याण को प्राप्त होता है परन्तु जिस व्रत का सर्वाधिक महत्व बताया गया है उसे एकादशी का व्रत कहते हैं। एकादशी का व्रत मनुष्य को उसके पापों से तार देता है ,मुक्त कर देता है, उसका परलोक सुधार देता है। आज की कथा में हम आपको पाशांकुश एकादशी जिसे पापांकुशा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है कि कथा सुनाएंगे। हमें पूर्ण आशा और विश्वास है कि आप सब इस एकादशी के व्रत को ध्यान पूर्वक सुनेंगे, इसकी विधि को समझेंगे, तत्पश्यात इसको करेंगे और अपने कल्याण को प्राप्त होंगे। पापंकुशा एकादशी व्रत कथा | Papankusha Ekadashi Vrat Katha युधिष्ठिर बोले कि हे भगवान! आश्विन मास की शुक्लपक्ष की एकादशी का क्या नाम है तथा उस व्रत के करने से कौन-कौन से फल मिलते हैं सो सब कहिये। उस पर श्रीकृष्ण भगवान बोले कि हे राजन! आश्विनमास की शुक्लपक्ष की एकादशी का नाम पाशांकुशा है। इसके व्रत करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।  इस एकादशी के दिन मनवांछित फल की प्राप्ति के लिए श्रीविष्णु भगवान की पू

रमा एकादशी महात्म्य कथा | रमा एकादशी महात्म्य | Rama Ekadashi Durlabh Vrat Katha

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 ॥ अथ रमा एकादशी माहात्म्य ॥ प्रिय भक्तों पुराणों में बहुत से व्रतों का विस्तार पूर्वक वर्णन मिलता है जिनको करने से मनुष्य अपने कल्याण को प्राप्त होता है परन्तु जिस व्रत का सर्वाधिक महत्व बताया गया है उसे एकादशी का व्रत कहते हैं। एकादशी का व्रत मनुष्य को उसके पापों से तार देता है ,मुक्त कर देता है, उसका परलोक सुधार देता है। आज की कथा में हम आपको रमा एकादशी कि कथा सुनाएंगे। हमें पूर्ण आशा और विश्वास है कि आप सब इस एकादशी के व्रत को ध्यान पूर्वक सुनेंगे, इसकी विधि को समझेंगे, तत्पश्यात इसको करेंगे और अपने कल्याण को प्राप्त होंगे। रमा एकादशी महात्म्य की दुर्लभ कथा धर्मराज युधिष्ठिर बोले- हे भगवान! अब आप मुझे कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की एकादशी की कथा सुनाइये । इस एकादशी का नाम क्या है तथा इससे कौन सा फल मिलता है? श्रीकृष्ण भगवान बोले कि राजराजेश्वर ! कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम रमा है। इसके व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। इसकी कथा इस प्रकार है। प्राचीनकाल में मुचुकुन्द नाम का एक राजा राज्य करता था। उसके इन्द्र वरुण कुबेर विभीषण आदि मित्र थे। वह सत्यवादी तथा विष्णु भक्त

Indira Ekadashi Mahatma Ki Durlabh Katha

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 ॥ अथ इन्दिरा एकादशी माहात्म्य ॥ प्रिय मित्रों आज हम आप सबके समक्ष इंदिरा एकादशी की कथा का वर्णन करेंगे। इंदिरा एकादशी की कथा का क्या महत्व है तथा इस कथा को किसने किससे कहा।? इन सभी तथ्यों का संपूर्ण विवेचन हम आपके समक्ष प्रस्तुत करेंगे।  हम आपको बताएंगे कि इंदिरा एकादशी का व्रत करने से क्या लाभ होता है, क्या पुण्य प्राप्त होता है तथा इसको करने से कौन-कौन से फलों की प्राप्ति होती है। अतः आप सबसे हमारा निवेदन है की ध्यान पूर्वक इस दिव्य एकादशी की कथा को सुने और पुण्य के भागी बने।  Indira Ekadashi Mahatma Ki Durlabh Katha धर्मराज युधिष्ठिर बोले- हे भगवान! अब आप कृपा पूर्वक.. आश्विन मास की कृष्णपक्ष की एकादशी की कथा सुनाइए! इस एकादशी का नाम क्या है तथा इस एकादशी के व्रत करने से कौन-कौन पुण्य फल प्राप्त होते हैं। सो सब आप विस्तार पूर्वक समझाकर कहिये।  इस पर श्री कृष्ण भगवान बोले कि हे राजश्रेष्ठ! आश्विन मास की कृष्णपक्ष की एकादशी का नाम इन्दिरा है। इस एकादशी के व्रत करने से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं तथा नरक में गए हुए उनके पितरों का भी उद्धार हो जाता है। हे राजन! इस एकादशी की

Parivartani Ekadashi Vrat Katha | Jal Jhulni Ekadashi Vrat Katha

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  ॥ अथ वामन (परिवर्तिनी ) एकादशी माहात्म्य ॥ धर्मराज युधिष्ठिर बोले कि हे भगवान्! भादों की शुक्लपक्ष की एकादशी का नाम तथा विधि क्या है। उस एकादशी के व्रत को करने से कौन सा फल मिलता है तथा उसका उपदेश कौन सा है? सो सब कहिए। श्रीकृष्ण भगवान बोले कि हे राजश्रेष्ठ! अब मैं अनेक पाप नष्ट करने वाली तथा अन्त में स्वर्ग देने वाली भादों की शुक्लपक्ष की वामन नाम की एकादशी की कथा कहता हूँ। इस एकादशी को जयन्ती एकादशी भी कहते हैं। इस एकादशी की कथा के सुनने मात्र से ही समस्त पापों का नाश हो जाता है।  इस एकादशी के व्रत का फल वाजपेय यज्ञ के फल से भी अधिक है। इस जयंती एकादशी की कथा से नीच पापियों का उद्धार हो जाता है। यदि कोई धर्म परायण मनुष्य एकादशी के दिन मेरी पूजा करता है तो मैं उसे संसार की पूजा का फल देता हूँ। जो मनुष्य मेरी पूजा करता है उसे मेरे लोक की प्राप्ति होती है। इस में किंचित मात्र भी संदेह नहीं।  जो मनुष्य इस एकादशी के दिन श्री वामन भगवान की पूजा करता है वह तीनों देवता अर्थात् ब्रह्मा, विष्णु, महेश की पूजा करता है। जो मनुष्य इस एकादशी का व्रत करते हैं उन्हें इस संसार में कुछ भी करना शेष नह

Kamada Ekadashi: कामदा एकादशी व्रत महात्म्य कथा | कामिका एकादशी व्रत कथा महात्म

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 ॥ अथ कामदा एकादशी व्रत माहात्म्य ॥ प्रिय भक्तो कामदा एकादशी को कामिका एकादशी भी कहते है। एकादशी का पुण्य शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता क्योकि वेद और शाश्त्र भी एकादशी व्रत महात्मा को सम्पूर्ण रूप से व्यक्त करने में असमर्थ रहे है और नेति-नेति कहकर इस व्रत के प्रभावों को बताते है।  कामदा या कामिका एकादशी व्रत कथा कुन्ती पुत्र धर्मराज युधिष्ठिर बोले कि हे भगवान अब आप मुझे श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी की सविस्तार कथा सुनाइए। उस एकादशी का नाम तथा उसकी विधि क्या है। उस में कौन से देवता की पूजा होती है। श्रीकृष्ण भगवान बोले - हे राजन! मैं एकादशी की कथा कहता हूँ, ध्यान पूर्वक सुनो। एक समय इस एकादशी की पावन कथा को भीष्म पितामह ने लोक हित के लिए नारदजी से कहा था। एक समय नारद जी ने पूछा कि पितामह! आज मेरी श्रावण माह के कृष्णपक्ष की एकादशी की कथा सुनने की इच्छा है। अतः अब आप एकादशी की व्रत कथा विधि सहित सुनाइये। भीष्म पितामह नारदजी के वचनों को सुनकर बोले-हे नारद जी आपने मुझसे यह अत्यन्त सुन्दर प्रश्न किया है अब आप ध्यान लगाकर सुनिये। श्रावण माह के कृष्णपक्ष की एकादशी का नाम कामदा है।

कामघेनु : Gau Mata Ek Devi Ya Pashu | गाय के 108 नाम और उनकी महिमा

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कामघेनु का स्वरुप  सनातन धर्म में पुरातन काल से ही गौ माता को विशेष स्थानीय विशेष दर्जा प्राप्त है।  गौ माता की उत्पत्ति समुद्र मंथन से मानी जाती है पर बहुत कम लोग यह जानते हैं कि समुद्र मंथन से पूर्व भी गौ माता का अस्तित्व था या यूं कहें कि सृष्टि के प्रारंभ से ही गौ माता का अस्तित्व पुराणों में व्याप्त है।  संसार की उत्पत्ति भगवान शिव से होती है तो उसी समय गौ माता की उत्पत्ति भी होती है और तभी से गौ माता को एक झूठ बोलने के कारण भगवान शिव से श्राप मिला कि आने वाले कलयुग में उन्हें अपने मुख से संसार में जूठन खानी पड़ेगी परंतु शिव बहुत दयालु है।  अतः इस श्राप के साथ ही साथ उन्हें यह वरदान भी मिला कि उनमें 33 कोटि देवताओं का वास होगा। समस्त संसार में एक देवी के रूप में उनकी पूजा की जाएगी और समस्त संसार उनके सामने सदैव नतमस्तक रहेगा। कामधेनु सुरभि गौमाता संसार की समस्त गउवों की माता और जननी है। इनका निवास स्थान स्वर्ग में होने के कारण अत्यधिक पूजनीय मानी जाती हैं। मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक उसके प्रत्येक संस्कार में कहीं ना कहीं गाय का योगदान रहता है।  हम सभी को गाय को एक पशु न समझ