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Showing posts from May, 2021

विष्णु अपामार्जन स्तोत्र: दिव्य हीलिंग और असाध्य रोग मुक्ति का मार्ग (Vishnu Apamarjana stotram)

Vishnu Apamarjana Stotram केवल एक धार्मिक पाठ नहीं है, बल्कि यह प्राचीन भारतीय "ध्वनि चिकित्सा" ( Sound Therapy ) का एक अद्भुत उदाहरण है। पद्म पुराण और विष्णुधर्मोत्तर पुराण में वर्णित यह स्तोत्र मानसिक शांति, शारीरिक आरोग्य और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा के लिए विश्व प्रसिद्ध है। ​अपामार्जन स्तोत्र क्या है? (What is Apamarjana Stotram?) ​'अपामार्जन' का अर्थ है - मार्जन् करना या पोंछकर साफ करना। जिस प्रकार जल शरीर की बाहरी शुद्धि करता है, उसी प्रकार इस स्तोत्र की ध्वनियाँ हमारे सूक्ष्म शरीर (Subtle Body) से रोगों और नकारात्मक संस्कारों को 'मार्जन्' कर देती हैं। ​मूल स्रोत: यह स्तोत्र मुख्य रूप से दो पुराणों में मिलता है: ​विष्णुधर्मोत्तर पुराण: ऋषि पुलस्त्य और ऋषि दाल्भ्य का संवाद। ​पद्य पुराण: भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को बताया गया महात्म्य। ​इस स्तोत्र के मुख्य लाभ (Key Benefits for Global Wellness) ​आज के समय में जब पूरी दुनिया Holistic Healing की ओर बढ़ रही है, अपामार्जन स्तोत्र निम्नलिखित लाभ प्रदान करता है: ​शारीरिक स्वास्थ्य (Physical H...

Bhagwan Satyanarayan Katha in Hindi | श्री सत्यनारायण की पौराणिक कथा

Shree Satyanarayan Ki Durlabh Vrat Katha भक्तजनो आज गुरुवार है, आज हम आपको सत्य के साक्षात स्वरुप भगवान सत्यनारायण की कथा बतायेंगे। भगवान  सत्यनारायण व्रत की सम्पूर्ण कथा पांच अध्यायों में है। हम अपने पाठकों के लिए पाँचों अध्याय प्रस्तुत कर रहे है। सत्यनारायण व्रत कथा का पहला अध्याय :  श्रीव्यास जी ने कहा – एक समय नैमिषारण्य तीर्थ में शौनक आदि सभी ऋषियों तथा मुनियों ने पुराणशास्त्र के वेत्ता श्रीसूत जी महाराज से पूछा – हे भगवान ऐसा कौन सा व्रत और तप है जिसको करने मात्र से समस्त मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं। हम सभी लालसा पूर्वक उस व्रत और तप को सुनना चाहते हैं। कृपया कर आप सविस्तार बताने की कृपा करें।  श्री सूतजी बोले – इसी प्रकार देवर्षि नारदजी के द्वारा भी पूछे जाने पर भगवान कमलापति ने उनसे जैसा कहा था, मैं आप सभी के समक्ष उसे कह रहा हूं, आप लोग सावधान होकर सुनें।  एक समय योगी नारदजी लोगों के कल्याण की कामना से विविध लोकों में भ्रमण करते हुए मृत्युलोक में आये और यहां उन्होंने अपने कर्मफल के अनुसार नाना योनियों में उत्पन्न सभी प्राणियों को अनेक प्रकार के क्लेश ...