सनातन धर्म में पुराण केवल प्राचीन कथाओं के संग्रह मात्र नहीं हैं, बल्कि वे मानवीय जीवन को दिशा देने वाले प्रकाश स्तंभ हैं। ये ग्रंथ जटिल दार्शनिक सत्यों को सरल कहानियों के माध्यम से जनमानस तक पहुँचाते हैं। आइए, पुराणों की गहराई और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव को विस्तार से समझते हैं। 1. जीवन की शिक्षा और नैतिक मार्गदर्शन पुराणों का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को धर्म के मार्ग पर बनाए रखना है। कर्तव्य और चेतावनी: पौराणिक कहानियाँ अक्सर उनको दर्शाती हैं जो अपने कर्तव्य से भटकने पर मिलते हैं। ये कहानियाँ हमें जीवन में सही और नैतिक चुनाव करने की प्रेरणा देती हैं। कर्म का सिद्धांत: पुराण इस बात पर जोर देते हैं कि हर क्रिया का एक निश्चित परिणाम होता है। यह 'कारण और प्रभाव' का नियम व्यक्ति में जवाबदेही की भावना पैदा करता है और उसे एक न्यायपूर्ण जीवन जीने की ओर ले जाता है। भक्ति का मार्ग: प्रह्लाद और ध्रुव जैसे चरित्रों के माध्यम से पुराण बताते हैं कि ईश्वर के साथ व्यक्तिगत संबंध और निस्वार्थ प्रेम ही आध्यात्मिक पूर्णता का असली रास्ता है। 2. भारतीय संस्कृति और परंपरा...
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