Skip to main content

Privacy Policy

At Ekadashi.org, accessible from www.ekadashi.org, the privacy of our visitors is a top priority. This document outlines the types of information collected and how we use it.

Information We Collect

​If you contact us directly, we may receive additional information about you such as your name, email address ekadashivratkathamahatma@outlook.com, and the contents of the message you may send us.

Log Files & Cookies

​Like most websites, we use log files (IP addresses, browser type, date/time stamps). We also use cookies to store information about visitors' preferences and to optimize the user experience based on browser type.

Google DoubleClick DART Cookie

​Google, as a third-party vendor, uses cookies to serve ads on our site. Google's use of the DART cookie enables it to serve ads to our users based upon their visit to our site and other sites on the Internet. You may opt out of the use of the DART cookie by visiting the Google ad and content network Privacy Policy.

https://policies.google.com/technologies/ads

Third-Party Privacy Policies

Ekadashi.org's Privacy Policy does not apply to other advertisers or websites. We advise you to consult the respective Privacy Policies of these third-party ad servers for more detailed information.

Comments

Popular posts from this blog

युगपुरुष महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि जी महाराज का जीवन परिचय (Biography)

सनातन धर्म की पुनर्स्थापना और संतों की भूमिका सनातन धर्म केवल एक धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है। भारत की इस पावन भूमि पर समय-समय पर ऐसी महान विभूतियों ने जन्म लिया है जिन्होंने समाज को नई दिशा दी है। परमानन्द जी महाराज एक ऐसी ही मशाल हैं जिन्होंने अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाया है। अध्याय 1: जन्म, बाल्यकाल और प्रारंभिक संस्कार (1935 - 1950) ​ विस्तृत विवरण: स्वामी जी का जन्म 26 अक्टूबर 1935 को उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के एक धर्मनिष्ठ परिवार में हुआ था। 30 के दशक का वह दौर भारत में वैचारिक क्रांति का दौर था। ​ पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनके परिवार के संस्कार और बचपन में देखे गए धार्मिक अनुष्ठानों का उन पर क्या प्रभाव पड़ा। ​ बाल्यकाल की अलौकिक घटनाएं: वे बचपन में अन्य बालकों से भिन्न कैसे थे? उनका झुकाव खेल-कूद के बजाय ध्यान और सत्संग की ओर कैसे बढ़ा? ​अध्याय 2: गुरु कृपा और सन्यास का संकल्प ​ चित्रकूट का आध्यात्मिक महत्व: जब हम परमानन्द जी महाराज के जीवन की बात करते हैं, तो स्वामी अखंडानंद जी महाराज का जिक्र अनिवार्य है। ​ प्रथम मिलन: चि...

Vishnu Shodasa Nama Stotram With Hindi Lyrics

विष्णु षोडश नाम स्तोत्रम् की उत्पत्ति   विष्णु षोडश नाम स्तोत्रम् भगवान विष्णु को समर्पित एक महामंत्र के रूप में जाना जाता है। सनातन धर्म में त्रिदेवो में भगवान श्री हरि विष्णु अर्थात भगवान नारायण एक विशेष स्थान रखते हैं। सभी प्राणियों को उनके कष्टों से मुक्ति पाने के लिए, उनकी इच्छाओ की पूर्ति के लिए भगवान विष्णु को समर्पित विष्णु षोडश नाम स्तोत्रम् का  प्रतिदिन पाठ करना चाहिए।  विष्णु षोडश नाम स्तोत्रम् भगवान् श्री हरी के 16 नमो को मिलकर बनाया गया एक महामंत्र है जिकी शक्ति अतुलनीय है। जो साधक प्रतिदिन स्तोत्र का जाप करता है, भगवान श्री विष्णु उस साधक के चारों तरफ अपना सुरक्षा कवच बना देते हैं। उस सुरक्षा कवच के कारण साधक के भोजन से उसकी औषधियां तक भगवान की कृपा से ओतप्रोत हो जाती है और साधक भगवान के संरक्षण को प्राप्त करता है। अतः विष्णु षोडश नाम स्तोत्रम को साधक को पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ जपना चाहिए क्योंकि नियमित रूप से साधक द्वारा पाठ करने से साधक के समस्त रोगो का नाश हो जाता है और साधक दीर्घायु को प्राप्त करता है।  Vishnu Shodasa Nama Sto...

विष्णु अपामार्जन स्तोत्र: दिव्य हीलिंग और असाध्य रोग मुक्ति का मार्ग (Vishnu Apamarjana stotram)

Vishnu Apamarjana Stotram केवल एक धार्मिक पाठ नहीं है, बल्कि यह प्राचीन भारतीय "ध्वनि चिकित्सा" ( Sound Therapy ) का एक अद्भुत उदाहरण है। पद्म पुराण और विष्णुधर्मोत्तर पुराण में वर्णित यह स्तोत्र मानसिक शांति, शारीरिक आरोग्य और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा के लिए विश्व प्रसिद्ध है। ​अपामार्जन स्तोत्र क्या है? (What is Apamarjana Stotram?) ​'अपामार्जन' का अर्थ है - मार्जन् करना या पोंछकर साफ करना। जिस प्रकार जल शरीर की बाहरी शुद्धि करता है, उसी प्रकार इस स्तोत्र की ध्वनियाँ हमारे सूक्ष्म शरीर (Subtle Body) से रोगों और नकारात्मक संस्कारों को 'मार्जन्' कर देती हैं। ​मूल स्रोत: यह स्तोत्र मुख्य रूप से दो पुराणों में मिलता है: ​विष्णुधर्मोत्तर पुराण: ऋषि पुलस्त्य और ऋषि दाल्भ्य का संवाद। ​पद्य पुराण: भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को बताया गया महात्म्य। ​इस स्तोत्र के मुख्य लाभ (Key Benefits for Global Wellness) ​आज के समय में जब पूरी दुनिया Holistic Healing की ओर बढ़ रही है, अपामार्जन स्तोत्र निम्नलिखित लाभ प्रदान करता है: ​शारीरिक स्वास्थ्य (Physical H...