॥ अपरा एकादशी माहात्म्य ॥ यूं तो संसार में अनेकों अनेक व्रत बतलाए गए हैं परंतु सनातन धर्म के पुराणों में जिस व्रत को सबसे विशिष्ट रूप में माना गया है उसे एकादशी के नाम से जाना जाता है। एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसका परलोक भी सुधर जाता है। एकादशी का व्रत करना समस्त प्राणी मात्र के लिए एक मात्र एक ऐसा साधन है जिसके द्वारा वह स्वयं के साथ-साथ अपने कुल का भी उद्धार कर सकता है। अतः हम सभी को यथासंभव एकादशी के व्रत को करना चाहिए क्योंकि एकादशी का व्रत भगवान श्री हरि को अधिक प्रिय है। अपरा एकादशी व्रत कथा श्रीयुधिष्ठिर बोले- हे भगवान! ज्येष्ठ मास की कृष्णपक्ष की एकादशी का नाम तथा माहात्म्य क्या है? सो कृपा कर कहिये। श्रीकृष्ण भगवान बोले कि हे राजन! ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम अपरा है। यह पुण्य देने वाली है। जो मनुष्य इस एकादशी का व्रत करते हैं उनकी लोक में प्रसिद्धि होती है। अपरा एकादशी के व्रत के प्रभाव से ब्रह्महत्या, भूत योनि, दूसरे की निन्दा आदि के पाप नष्ट हो जाते हैं। इसके व्रत से पर स्त्री के साथ भोग करने वालों ...
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