Nirjala Ekadashi Vrat Katha, Mahatva, and Puja Vidhi in Hindi: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। वैसे तो साल में 24 एकादशियां आती हैं, लेकिन इन सबमें सबसे कठिन और फलदायी निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) को माना जाता है। यदि आप साल भर की सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते हैं, तो केवल निर्जला एकादशी का व्रत रखने से आपको सभी 24 एकादशियों के पुण्य फल की प्राप्ति हो सकती है। इस लेख में हम जानेंगे कि निर्जला एकादशी क्यों मनाई जाती है, इसकी पौराणिक व्रत कथा क्या है, और इस दिन राशि अनुसार किन चीजों का दान करना चाहिए ताकि सीधे विष्णु लोक की प्राप्ति हो। निर्जला एकादशी क्या है और इसे क्यों सर्वश्रेष्ठ माना जाता है? ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है। जैसा कि इसके नाम 'निर्जला' से ही स्पष्ट है—इस व्रत में सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी के सूर्योदय तक जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती है। भीषण गर्मी के महीने (मई-जून) में बिना पानी के रहना बेहद कठिन तपस्या माना जाता है, इसलिए इसे सभी एकादशियों में सबसे बड़ी और श्रेष्ठ एकादशी का दर्ज...
Ekadashi Vrat Katha Mahatma
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