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माघ पूर्णिमा और भगवान सत्यनारायण: महिमा, व्रत कथा और आध्यात्मिक रहस्य

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भीष्म पितामह का अर्जुन को उपदेश: ये 4 प्रकार का भोजन है 'विष' के समान, आज ही त्यागें!

महाभारत का युद्ध केवल अस्त्रों और शस्त्रों का खेल नहीं था, बल्कि यह ज्ञान, नीति और धर्म का एक महासागर था। जब गंगापुत्र भीष्म पितामह कुरुक्षेत्र की रणभूमि में शरशय्या (बाणों की शय्या) पर लेटे हुए सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा कर रहे थे, तब उन्होंने पांडवों को जीवन के वह गूढ़ रहस्य बताए जो आज भी कलयुग के प्राणी के लिए 'अमृत' के समान हैं। ​विशेष रूप से, भीष्म पितामह ने अर्जुन को 'भोजन की शुद्धता' पर जो शिक्षा दी, वह हमारे शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अनिवार्य है। ekadashi.org के इस विस्तृत लेख में, आइए जानते हैं कि भीष्म पितामह ने किन 4 प्रकार के भोजन को 'विष' और 'मदिरा' के समान बताकर उनका त्याग करने को कहा है। ​अन्न का आध्यात्मिक महत्व ​शास्त्रों में कहा गया है— "जैसा अन्न, वैसा मन" । अन्न साक्षात माता अन्नपूर्णा का स्वरूप है। हम जो भोजन ग्रहण करते हैं, वह केवल पेट नहीं भरता, बल्कि उससे हमारे विचारों का निर्माण होता है। भीष्म पितामह अर्जुन से कहते हैं कि हे कुंतीपुत्र! भोजन की शुद्धता से ही कर्म की शुद्धत...

जया एकादशी: व्रत कथा, महत्व और पूजा विधि | Jaya Ekadashi Vrat Katha & Significance

हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष भर में आने वाली 24 एकादशियों में माघ शुक्ल पक्ष की जया एकादशी का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। इसे 'अजा एकादशी' (कुछ क्षेत्रों में) या 'भीष्म एकादशी' के आस-पास आने वाली कल्याणकारी तिथि भी माना जाता है। यह व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि आध्यात्मिक शुद्धि के लिए भी मील का पत्थर माना गया है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को 'जया एकादशी' के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व है क्योंकि यह न केवल पापों का नाश करती है, बल्कि साधक को नीच योनियों (जैसे प्रेत योनि) से मुक्ति भी दिलाती है। ​भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर को इस एकादशी की महिमा बताई थी। आइए विस्तार से जानते हैं जया एकादशी की व्रत कथा और इसकी पूजन विधि। जया एकादशी का धार्मिक महत्व ​धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, जया एकादशी का व्रत रखने से मनुष्य को ब्रह्महत्या जैसे घोर पापों से मुक्ति मिल जाती है। जो व्यक्ति निष्ठापूर्वक इस दिन उपवास रखता है, उसे मृत्यु के पश्चात पिशाच योनि में नहीं भटकना पड़ता और उसे बैकुंठ धाम की प्राप्ति होत...

ऋण मोचक मंगल स्तोत्र: भारी से भारी कर्ज से मुक्ति पाने का अचूक उपाय

क्या आप कर्ज के बोझ से दबे हुए हैं? क्या कड़ी मेहनत के बाद भी आपका पैसा बीमारियों या फालतू के खर्चों में निकल जाता है? ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, जब कुंडली में मंगल ग्रह (Mars) की स्थिति प्रतिकूल होती है, तो व्यक्ति चाहकर भी ऋण (Loan) से बाहर नहीं निकल पाता। ​ऐसे में 'ऋण मोचक मंगल स्तोत्र' का पाठ एक रामबाण उपाय माना गया है। आइए जानते हैं इसकी महिमा और पाठ करने की सही विधि। ​क्यों होता है कर्ज? ज्योतिषीय कारण ​शास्त्रों के अनुसार, मंगल को 'भूमिपुत्र' और 'ऋणहर्ता' माना गया है। यदि मंगल प्रसन्न हों, तो व्यक्ति को भूमि, भवन और धन का सुख मिलता है। लेकिन मंगल दोष होने पर व्यक्ति अनचाहे ऋण के जाल में फंस जाता है। ऋण मोचक स्तोत्र का जाप मंगल के नकारात्मक प्रभाव को कम कर धन आगमन के नए स्रोत खोलता है। ​ऋण मोचक मंगल स्तोत्र की पाठ विधि ​इस स्तोत्र का पूरा लाभ लेने के लिए इसे नियमपूर्वक करना चाहिए: ​ दिन और समय: इसे किसी भी मंगलवार से शुरू करें। शुक्ल पक्ष का मंगलवार हो तो और भी श्रेष्ठ है। ​ वस्त्र और पूजन: स्नान के बाद लाल रंग के वस्त्र धारण...

Basant Panchami: क्यों मनाई जाती है बसंत पंचमी? जानें सरस्वती पूजा की विधि, महत्व और पौराणिक कथा

बसंत पंचमी (Basant Panchami) का त्योहार हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इसे 'ऋतुराज बसंत' के आगमन का प्रतीक और ज्ञान की देवी मां सरस्वती का जन्मोत्सव माना जाता है। ​इस लेख में हम जानेंगे कि बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है, इसका आध्यात्मिक महत्व क्या है और इस दिन की पूजा विधि क्या है। ​ बसंत पंचमी का धार्मिक और पौराणिक महत्व ​धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने जब ब्रह्मांड की रचना की, तो उन्हें सब कुछ शांत और मौन लगा। जीव-जंतु और मनुष्य सभी मूक थे। इस सन्नाटे को दूर करने के लिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे एक दिव्य देवी प्रकट हुईं। ​उनके हाथों में वीणा, पुस्तक और माला थी। ​जैसे ही देवी ने वीणा का तार छेड़ा, समस्त संसार को वाणी मिल गई। ​नदियों में कल-कल की ध्वनि, पक्षियों में चहचहाहट और मनुष्यों में बोलने की शक्ति आ गई। ​चूंकि यह घटना माघ शुक्ल पंचमी को हुई थी, इसलिए इस दिन को सरस्वती जयंती या बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाने लगा। ​ मां सरस्वत...

कनकधारा स्तोत्र: दरिद्रता को जड़ से मिटाने और अपार धन प्राप्ति का अचूक दिव्य मंत्र

आज के भागदौड़ भरे जीवन में आर्थिक स्थिरता और सुख-समृद्धि की चाह हर किसी को होती है। कई बार कठिन परिश्रम के बाद भी फल नहीं मिलता और व्यक्ति कर्ज या दरिद्रता के जाल में फंसा रहता है। शास्त्रों में इस समस्या का सबसे प्रभावी और चमत्कारिक समाधान 'कनकधारा स्तोत्र' (Kanakadhara Stotram) को बताया गया है। ​माना जाता है कि यदि पूरी श्रद्धा के साथ इसका पाठ किया जाए, तो यह न केवल धन की कमी को दूर करता है, बल्कि घर में सुख-शांति और माता लक्ष्मी का स्थाई वास भी सुनिश्चित करता है। ​कनकधारा स्तोत्र की उत्पत्ति: एक चमत्कारिक कथा ​इस स्तोत्र की रचना आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी। कथा के अनुसार, जब शंकराचार्य एक निर्धन महिला के घर भिक्षा मांगने पहुंचे, तो उस महिला के पास देने के लिए केवल एक सूखा आंवला था। महिला की इस निस्वार्थ भावना और गरीबी को देख शंकराचार्य का हृदय पसीज गया। ​उन्होंने माता लक्ष्मी की स्तुति में तत्काल 'कनकधारा स्तोत्र' की रचना की। उनकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर माता लक्ष्मी ने उस घर में सोने के आंवलों की वर्षा कर दी। तभी से इसे 'कनकधारा' (सोने ...

मौनी अमावस्या 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और दान का फल

मौनी अमावस्या 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और दान का फल ​हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मौनी अमावस्या ( Mauni Amavasya ) कहा जाता है। इसे 'माघ अमावस्या' के नाम से भी जाना जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह दिन मौन रहकर आत्म-साक्षात्कार करने और पवित्र नदियों में स्नान करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। ​मौनी अमावस्या 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त ​साल 2026 में मौनी अमावस्या की तिथि को लेकर विशेष संयोग बन रहे हैं। विवरण तिथि और समय अमावस्या तिथि प्रारंभ 17 जनवरी 2026, रात से अमावस्या तिथि समाप्त 18 जनवरी 2026, शाम तक मुख्य स्नान पर्व 18 जनवरी 2026 (रविवार) ब्रह्म मुहूर्त स्नान सुबह 05:25 से 06:15 तक मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व ​पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माघ के महीने में देवलोक के समस्त देवी-देवता प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर निवास करते हैं। ​ अमृत तत्व की प्राप्ति: कहा जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत कलश निकला, तो उसकी कुछ बूंदें प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक की नदियों में गिरी थीं। अमा...