परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा 2026 | जलझूलनी एकादशी कथा, महत्व और पूजा विधि
॥ अथ वामन (परिवर्तिनी) एकादशी माहात्म्य ॥ भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की परम पावन जलझूलनी एकादशी का पूर्ण विधान, कथा एवं आध्यात्मिक महत्व प्रिय सनातन धर्मावलंबियों एवं एकादशी व्रत के साधकों! हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि अत्यंत मंगलकारी, पवित्र एवं सर्वपापहारिणी मानी गई है। शास्त्रों में इस पावन एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी , जलझूलनी एकादशी , वामन एकादशी , पार्श्व एकादशी तथा जयंती एकादशी जैसे अनेक दिव्य नामों से संबोधित किया गया है। सनातन परंपरा और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के चार महीनों में जगत के पालनहार श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में लीन रहते हैं। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की इस विशेष तिथि को योगनिद्रा में शयन करते हुए भगवान विष्णु अपनी करवट बदलते हैं। भगवान के स्थान/करवट बदलने (परिवर्तन) के कारण ही इस पुण्यप्रद एकादशी को 'परिवर्तिनी एकादशी' कहा गया है। इसके अतिरिक्त, भारतवर्ष के कई सांस्कृतिक क्षेत्रों विशेषकर राजस्थान, गुजरात और उत्तर भार...