धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक, महाकाल भैरव स्तोत्र एक बहुत ही असरदार स्तोत्र है। भैरव अष्टमी, भैरव जयंती, या फिर हर रविवार या बुधवार को इसका पाठ करने से हर तरह की परेशानी दूर होती है। Bhagwan Kaal Bhairav काल भैरव, भगवान शिव का एक रूप हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भगवान शिव, काल भैरव के रूप में प्रकट हुए थे। भैरव, शिव के गण और पार्वती के अनुचर माने जाते हैं। भैरव, परमात्मा के जंगली और शक्तिशाली पक्ष को दर्शाते हैं। काल भैरव की जयंती मंगलवार या रविवार को मनाई जाती है। इसे महाकाल भैरव जयंती या काल भैरव अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। कहते हैं कि काल भैरव की कृपा जिस पर हो जाए, उस पर कभी कोई संकट नहीं आता। काल भैरव की उत्पत्ति के बारे में एक कहानी यह है कि ऋषि-मुनियों की बातें सुनकर ब्रह्मा जी का एक सिर क्रोध से जलने लगा। वे क्रोध में आकर भगवान शंकर का अपमान करने लगे। इससे भगवान शंकर भी अत्यंत क्रोधित होकर रौद्र रूप में आ गए और उनसे ही उनके रौद्र स्वरूप काल भैरव की उत्पत्ति हुई। काल भैरव ने घमंड में चूर ब्रह्म देव के जलते हुए सिर को काट दिया। काल भैरव जयंती कब ह...
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