Navdurga-Dwitiya-Swaroop-Mata-Brahmacharini प्रणाम भक्तों, नवरात्रि के द्वितीय दिवस में आप सभी का स्वागत है। नवरात्रि के दूसरे दिन माता आदिशक्ति के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा का विधान है। माता ब्रह्मचारिणी माता पार्वती का ही एक रूप है। माता ब्रह्मचारि णी का रंग गौर वर्ण का माना जाता है। यही कारण है कि माता को श्वेत वस्त्र अत्यधिक प्रिय हैं। माता को श्वेत वस्तु का ही भोग भी लगाया जाता है। माता के स्वरूप के दर्शन करने से साधक के विभिन्न रोग नष्ट हो जाते हैं। उसे असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है। नवरात्रि के दूसरे दिन में माता ब्रह्मचारिणी की पूजा पूर्ण विधि विधान के साथ करनी चाहिए। शिव महापुराण के अनुसार जब माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया तब माता के उस कठोर तप वाले स्वरूप को ब्रह्मचारिणी के नाम से जाना गया अर्थात ब्रह्मचारिणी माता वही हैं जिन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी। माता के स्वरूप की विशिष्टता इस बात में है कि माता के दाएं हाथ में एक माला और बाएं हाथ में माता ने कमंडल को धारण कर रखा है। पौराणिक मान्यताओं के...
एकादशी व्रत कथा माहात्म्य (ekadashi.org) पर आपका स्वागत है। यह मंच केवल एकादशी व्रत की तिथियों और कथाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ आपको वेदों, पुराणों और प्राचीन भारतीय इतिहास का दिव्य संगम मिलेगा। हम आपके लिए लाए हैं सनातन धर्म का वह गूढ़ ज्ञान और पौराणिक रहस्य जो आपकी आध्यात्मिक यात्रा को समृद्ध करेंगे। प्रामाणिक वैदिक सूत्रों और ऐतिहासिक तथ्यों के साथ ईश्वरीय ज्ञान को सरल हिंदी में समझने के लिए हमसे जुड़ें। अपनी संस्कृति और धर्म की जड़ों से गहराई से जुड़ने का एक वैश्विक केंद्र।