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Showing posts from December, 2023

महान भारतीय गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आचार्य आर्यभट का जीवन परिचय

भारत का इतिहास केवल राजा-महाराजाओं और युद्धों की गाथा नहीं है, बल्कि यह उन ऋषियों और वैज्ञानिकों का भी इतिहास है जिन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता से आधुनिक विज्ञान की नींव रखी। सनातन धर्म के सिद्धांतों और प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति ने संसार को ऐसे रत्न दिए हैं जिनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। इन्हीं महान विभूतियों में अग्रणी नाम है आचार्य आर्यभट का। ​आचार्य आर्यभट वह वैज्ञानिक थे जिन्होंने पश्चिम से सदियों पहले खगोल विज्ञान और गणित के उन रहस्यों को सुलझा लिया था, जिन्हें आज आधुनिक विज्ञान अपना आधार मानता है। ​ प्रारंभिक जीवन और जन्म स्थान ​आचार्य आर्यभट का जन्म 476 ईस्वी (शक संवत 398) में हुआ था। उनके जन्मस्थान को लेकर विद्वानों में कुछ मतभेद हैं, लेकिन उनके प्रसिद्ध ग्रंथ 'आर्यभटीय' के अनुसार, उन्होंने कुसुमपुर (वर्तमान पटना, बिहार) में अपनी शिक्षा प्राप्त की और वहीं अपना अधिकांश कार्य किया। प्राचीन काल में कुसुमपुर महान मगध साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र का ही एक भाग था। ​कुछ ऐतिहासिक साक्ष्य यह भी बताते हैं कि वह अश्मक (महाराष्ट्र) के निवासी थे, लेकिन उनकी कर्मभूमि...

पीपल का पूजन क्यों? | सनातन धर्म में पीपल को पूजनीय क्यों माना जाता है?

पौराणिक काल से ही सनातन धर्म में वृक्षों को पूजनीय माना जाता है। शास्त्रों पुराणों में आनेको ऐसे वृक्षों की व्याख्या मिलती है जिनकी सनातन धर्म में आज भी पूजा होती है। हिंदू धर्म में पीपल, बरगद, आम, बिल्व, और अशोक को पवित्र माना गया है। इनके अलावा, भारत में पीपल, तुलसी, वट वृक्ष, केला, और बेलपत्र जैसे पेड़ों की पूजा की जाती है।  Peepal Ka Ped ( Ficus religiosa or sacred fig plant) शास्त्रों में पीपल को देव वृक्ष कहा गया है। ऐसा कहा जाता है कि इस पेड़ के हर पत्ते पर देवताओं का वास होता है। शास्त्रों के अनुसार इस वृक्ष में सभी देवी-देवताओं और हमारे पितरों का वास भी माना गया है। तैत्तिरीय संहिता में प्रकृति के सात पावन वृक्षों में पीपल की गणना है और ब्रह्मवैवर्तपुराण में पीपल की पवित्रता के संदर्भ में काफी उल्लेख मिलता है। पद्मपुराण के अनुसार पीपल का वृक्ष भगवान् विष्णु का रूप है। इसीलिए इसे धार्मिक क्षेत्र में श्रेष्ठ देव वृक्ष की पदवी मिली और इसका विधिवत् पूजन आरंभ हुआ। अनेक अवसरों पर पीपल की पूजा का विधान है। सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष में साक्षात् भगवान् व...

Ekadashi: Mokshada Ekadashi Vrat Katha | मोक्षदा एकादशी व्रत कथा

संसार के सभी व्रतों में एकादशी का व्रत विशेष महत्व रखता है। यू तो सनातन धर्म में बताए गए प्रत्येक व्रत को करने से प्राणी के सतोगुण की वृद्धि होती है, उसका चित शुद्ध होता है और साधक का आध्यातिक कल्याण होता है परंतु जो प्राणी ज्यादा व्रत इत्यादि न कर सके उनको एकादशी का व्रत करने का अनुग्रह शास्त्रों द्वारा किया गया है। ॥ अथ मोक्षदा एकादशी महात्म्य ॥ श्री युधिष्ठर बोले कि हे भगवान! आप सबको सुख देने वाले हैं और जगत के पति हैं इसलिये मैं आपको नमस्कार करता हूँ। कृपाकर मेरे एक संशय को दूर कीजिये। मार्गशीर्ष माह के शुक्लपक्ष की एकादशी का नाम क्या है। उस दिन कौन से देवता की पूजा की जाती है और उसकी विधि क्या है? भगवन मेरे इन प्रश्नों का उत्तर देकर मेरे संदेह को दूर कीजिये। भगवान श्री कृष्णजी बोले हे राजन! आप ने अन्यन्त उत्तम प्रश्न किया है। आप ध्यान पूर्वक सुनिये मार्गशीर्ष माह के शुक्लपक्ष की एकादशी मोक्षदा के नाम से प्रसिद्ध है। इस दिन श्रीदामोदर भगवान की पूजा धूप, दीप, नैवेद्य आदि से भक्ति पूर्वक करनी चाहिये। अब मैं एक पुराणों की कथा कहता हूँ। इस एकादशी के व्रत के प्रभाव से नरक मे...