भारत का इतिहास केवल राजा-महाराजाओं और युद्धों की गाथा नहीं है, बल्कि यह उन ऋषियों और वैज्ञानिकों का भी इतिहास है जिन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता से आधुनिक विज्ञान की नींव रखी। सनातन धर्म के सिद्धांतों और प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति ने संसार को ऐसे रत्न दिए हैं जिनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। इन्हीं महान विभूतियों में अग्रणी नाम है आचार्य आर्यभट का। आचार्य आर्यभट वह वैज्ञानिक थे जिन्होंने पश्चिम से सदियों पहले खगोल विज्ञान और गणित के उन रहस्यों को सुलझा लिया था, जिन्हें आज आधुनिक विज्ञान अपना आधार मानता है। प्रारंभिक जीवन और जन्म स्थान आचार्य आर्यभट का जन्म 476 ईस्वी (शक संवत 398) में हुआ था। उनके जन्मस्थान को लेकर विद्वानों में कुछ मतभेद हैं, लेकिन उनके प्रसिद्ध ग्रंथ 'आर्यभटीय' के अनुसार, उन्होंने कुसुमपुर (वर्तमान पटना, बिहार) में अपनी शिक्षा प्राप्त की और वहीं अपना अधिकांश कार्य किया। प्राचीन काल में कुसुमपुर महान मगध साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र का ही एक भाग था। कुछ ऐतिहासिक साक्ष्य यह भी बताते हैं कि वह अश्मक (महाराष्ट्र) के निवासी थे, लेकिन उनकी कर्मभूमि...
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