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Showing posts from September, 2017

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होई की असली कहानी | अहोई अष्टमी की सच्ची कहानी | स्याऊ माता की सच्ची कहानी | बिन्दायकजी की कहानी

अहोई अष्टमी की दुर्लभ कथा एक साहूकार का सात बेटा, सात बहुवां और एक बेटी थी। एक दिन सातू बहूवां और बेटी खन्द माटी ल्या न गई। माटी खोद न क समय नणद क हाथ स स्याऊ का बच्चा मरगा। स्याऊ माता बोली की अब म तेरी  कूख  बांदूगी। नणद आपकी सारी भाभियां न कयो कि मे र बद ल कूख बंधवाल्यो। छ भाभियां तो नटगी, पर छोटी भाभी थी, जिकी सोची कि नहीं बंधवागां तो सासुजी नाराज हो जासी, सो बा आपकी कृख बंधवाली दिक टाबर होता और होई सा त क दिन मर जाता।  एक दिन वा पण्डितां न बुला कर पुछ्यो कि यो के दोष ह, मे र टावर होतां ही मर जा व पण्डित बोल्या कि तूं सुरही गाय की सेवा किया कर, बा स्याऊ माता की भावली ह, जिको तेरी कूख छुड़वा देसी, जद ही तेरा टावर जीसी वा खूब सुदियां उठ कर सुरही गाय को सारो काम कर क आ जाती। एक दिन गऊ माता सोची कि आजकल कुण मेरो इतनो काम कर ह, बहूवां तो लड़ाई करती रहती थी। आज देखनो चाहिये कि कुनसी काम कर ह। गऊ माता खूब सुदियां उठ कर बैठगी, देख तो साहूकार क बेटा की बहू सारी काम कर ह। गऊ माता पूछी कि त न के चाहिये ह, सो मेरो इतनो काम कर ह वा बोली की मन बाचा दे, गऊ माता ऊन बाचा दे दिया। बहू बोल
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Swami Parmanand Giri Ji Maharaj- Motivational Speech Part 5

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