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पापांकुशा एकादशी महात्म्य कथा | पाशांकुश एकादशी महात्म्य | Papankusha Ekadashi Vrat Katha

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 ॥ अथ पाशांकुशा एकादशी माहात्म्य ॥ प्रिय भक्तों पुराणों में बहुत से व्रतों का विस्तार पूर्वक वर्णन मिलता है जिनको करने से मनुष्य अपने कल्याण को प्राप्त होता है परन्तु जिस व्रत का सर्वाधिक महत्व बताया गया है उसे एकादशी का व्रत कहते हैं। एकादशी का व्रत मनुष्य को उसके पापों से तार देता है ,मुक्त कर देता है, उसका परलोक सुधार देता है। आज की कथा में हम आपको पाशांकुश एकादशी जिसे पापांकुशा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है कि कथा सुनाएंगे। हमें पूर्ण आशा और विश्वास है कि आप सब इस एकादशी के व्रत को ध्यान पूर्वक सुनेंगे, इसकी विधि को समझेंगे, तत्पश्यात इसको करेंगे और अपने कल्याण को प्राप्त होंगे। पापंकुशा एकादशी व्रत कथा | Papankusha Ekadashi Vrat Katha युधिष्ठिर बोले कि हे भगवान! आश्विन मास की शुक्लपक्ष की एकादशी का क्या नाम है तथा उस व्रत के करने से कौन-कौन से फल मिलते हैं सो सब कहिये। उस पर श्रीकृष्ण भगवान बोले कि हे राजन! आश्विनमास की शुक्लपक्ष की एकादशी का नाम पाशांकुशा है। इसके व्रत करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।  इस एकादशी के दिन मनवांछित फल की प्राप्ति के लिए श्रीविष्णु भगवान की पू

रमा एकादशी महात्म्य कथा | रमा एकादशी महात्म्य | Rama Ekadashi Durlabh Vrat Katha

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 ॥ अथ रमा एकादशी माहात्म्य ॥ प्रिय भक्तों पुराणों में बहुत से व्रतों का विस्तार पूर्वक वर्णन मिलता है जिनको करने से मनुष्य अपने कल्याण को प्राप्त होता है परन्तु जिस व्रत का सर्वाधिक महत्व बताया गया है उसे एकादशी का व्रत कहते हैं। एकादशी का व्रत मनुष्य को उसके पापों से तार देता है ,मुक्त कर देता है, उसका परलोक सुधार देता है। आज की कथा में हम आपको रमा एकादशी कि कथा सुनाएंगे। हमें पूर्ण आशा और विश्वास है कि आप सब इस एकादशी के व्रत को ध्यान पूर्वक सुनेंगे, इसकी विधि को समझेंगे, तत्पश्यात इसको करेंगे और अपने कल्याण को प्राप्त होंगे। रमा एकादशी महात्म्य की दुर्लभ कथा धर्मराज युधिष्ठिर बोले- हे भगवान! अब आप मुझे कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की एकादशी की कथा सुनाइये । इस एकादशी का नाम क्या है तथा इससे कौन सा फल मिलता है? श्रीकृष्ण भगवान बोले कि राजराजेश्वर ! कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम रमा है। इसके व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। इसकी कथा इस प्रकार है। प्राचीनकाल में मुचुकुन्द नाम का एक राजा राज्य करता था। उसके इन्द्र वरुण कुबेर विभीषण आदि मित्र थे। वह सत्यवादी तथा विष्णु भक्त