प्रकृति प्रतिक्षण बदल रही है। आने वाला पल अगले ही पल में बीता हुआ पल कहलाता है। यह संसार भी प्रति पल-पल बदल रहा है क्योंकि यह संसार प्रकृति के अधीन है। समस्त सृष्टि इस प्रकृति की गोद से ही उत्पन्न हुई है। इसलिए हम सभी को प्रकृति का सम्मान करना चाहिए और प्रकृति के नियमों का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। प्रकृति ने हमें जितने भी प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध कराएं हैं हमें उन प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग कभी नहीं करना चाहिए अर्थात प्रकृति से हमें केवल उतना ही लेना चाहिए जितना हमारी आवश्यकता के अनुसार हो। पेड़ों की लकड़ियों के अलावा प्रकृति हमें बहुत सारे प्राकृतिक संसाधन प्रदान करती है जिसमें तेल, खनिज, धातु इत्यादि अलग प्रकार की वस्तुएं हैं। यह प्रकृति ही है जो हमें सांस लेने के लिए शुद्ध वायु प्रदान करती है पर क्या प्रकृति द्वारा प्राप्त समस्त संसाधनों का हमने सदुपयोग किया ? ये एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर हम सबके पास है पर हममे से कोई भी इस प्रश्न का उत्तर देना नहीं चाहता। आज के भौतिक समाज की सत्यता केवल इतनी है की हमे जिससे जो चाहिए बस वो हमें प्...
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