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Showing posts from November, 2021

Dev Uthani Ekadashi Vrat Katha | Prabodhini Ekadashi Vrat Katha | Ekadashi Mahatm Katha

॥ अथ प्रबोधिनी देवोत्थान एकादशी माहात्म्य ॥ बह्माजी बोले कि हे मुनिश्रेष्ठ! अब आप पापों को नष्ट करने वाली तथा पुण्य और मुक्ति को देने वाली प्रबोधिनी एकादशी का माहात्म्य सुनिये। भागीरथी गंगा तथा तीर्थ, नदी, समुद्र आदि तभी तक फल देते हैं जब तक प्रबोधिनी एकादशी नहीं आती कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रबोधिनी एकादशी के व्रत का फल एक सहस्त्र अश्वमेघ तथा सौ राजसूय यज्ञ के फल के बराबर होता है। नारदजी ने पूछा कि-हे पिताजी! यह संध्या को भोजन करने से, रात्रि में भोजन करने तथा पूरे दिन उपवास करने से क्या 2 फल मिलता है? उसे आप समझाइये।  ब्रह्माजी बोले कि हे नारद! एक संध्या को भोजन करने से एक जन्म का, रात्रि में भोजन करने से दो जन्म का तथा पूरे दिन उपवास करने से सात जन्म के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। प्रबोधिनी एकादशी के व्रत के प्रभाव से सुमेरू पर्वत के समान कठिन पाप क्षण मात्र में ही नष्ट हो जाते हैं।  अनेकों पूर्व जन्म के किये हुए बुरे कर्मों को यह प्रबोधिनी एकादशी का व्रत क्षण भर में नष्ट कर देता है। जो मनुष्य अपने स्वभावानुसार इस प्रबोधिनी एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करते हैं उन्हें पूर...

एकादशी व्रत का महत्व, विधि, नियम, क्या खाएं और फायदे | Ekadashi Vrat Significance, Rules & Benefits

एकादशी व्रत क्या है? एकादशी हिंदू पंचांग की 11वीं तिथि होती है। यह हर महीने दो बार आती है—एक बार कृष्ण पक्ष में और एक बार शुक्ल पक्ष में। इस प्रकार वर्ष में सामान्यतः 24 एकादशी होती हैं, और अधिक मास में यह संख्या 26 भी हो सकती है। वैष्णव परंपरा में यह तिथि विशेष रूप से भगवान विष्णु की उपासना, मन की शुद्धि, इंद्रिय-निग्रह और भक्ति के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। एकादशियों के नाम १. उत्पन्ना, २. मोक्षदा, ( मोक्ष प्रदान करने वाली), ३. सफला (सफलता देने वाली), ४. पुत्रदा (पुत्र को देने वाली), ५. षट्तिला, ६. जया , ७. विजया , ८. आमलकी, ९. पाप मोचनी (पापों को नष्ट करने वाली), १०. कामदा, ११. बरूथनी, १२. मोहिनी, १३. अपरा, १४. निर्जला, १५. योगिनी, १६. देवशयनी, १७. कामिदा, १८. पुत्रदा, १९. अजा, २०. परिवर्तिनी, २१. इन्द्रर, २२. पाशांकुशा, २३. रमा, २४. देवोत्यानी।  एकादशी व्रत का महत्व क्या है? एकादशी व्रत का महत्व केवल उपवास तक सीमित नहीं है। यह दिन आत्मसंयम, सात्त्विकता, प्रार्थना, जप, ध्यान और भगवान विष्णु की भक्ति के लिए समर्पित माना जाता है। परंपरानुसार यह व्रत मन की अशुद्धियों को कम कर...