देवराहा बाबा: एक रहस्यमयी सिद्ध महायोगी की जीवन गाथा

Devraha Baba (देवरहा बाबा): एक रहस्यमयी सिद्ध महायोगी की जीवन गाथा

भारत की पावन धरा अनंत काल से ऋषि-मुनियों और सिद्ध योगियों की तपोस्थली रही है। इन्हीं महान विभूतियों में एक ऐसा नाम शामिल है, जिसके सामने समय की सीमाएं भी छोटी पड़ गईं— ब्रह्मर्षि देवराहा बाबा। यमुना के तट पर लकड़ी के ऊंचे मचान पर निवास करने वाले बाबा केवल एक संत नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक रहस्य थे। कहा जाता है कि उन्होंने कई सदियों तक जीवित रहकर योग की शक्ति से मृत्यु पर विजय प्राप्त की थी। आज के इस विशेष लेख में, हम ekadashi.org पर उस 'मचान वाले बाबा' की रहस्यमयी जीवन गाथा, उनके अद्भुत चमत्कार और उनकी दिव्य शिक्षाओं की गहराई में उतरेंगे।

Devaraha Baba, the mysterious saint of India, sitting in a meditative pose on a wooden Machan (platform) near the Yamuna river, surrounded by a spiritual forest atmosphere.

कौन थे Devraha Baba (देवरहा बाबा)? (Who was Devraha Baba?)

देवराहा बाबा एक विश्व प्रसिद्ध भारतीय सिद्ध महायोगी थे, जो मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सलेमपुर तहसील के पास सरयू नदी के किनारे रहते थे। उनका वास्तविक नाम, जन्मतिथि और जन्म स्थान अज्ञात है। उन्होंने अपना अधिकांश जीवन एक लकड़ी के बने ऊँचे मचान पर बिताया, जो जमीन से लगभग 12-15 फीट ऊँचा होता था। वे इसी मचान से अपने भक्तों को दर्शन और आशीर्वाद देते थे। उनका मानना था कि शरीर को सीधे धरती के स्पर्श से बचाकर ऊर्जा को संरक्षित किया जा सकता है।

रहस्यमयी आयु और जन्म का रहस्य

Devraha Baba (देवरहा बाबा) की आयु उनके जीवन का सबसे बड़ा रहस्य थी। उनके भक्त और अनुयायी दावा करते हैं कि वे 250, 500, या कुछ तो 900 वर्षों तक जीवित रहे। हालाँकि इन दावों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने स्वयं कहा था कि उन्होंने अपने पिता और दादा को भी बाबा के दर्शन करते देखा था, और तब भी बाबा उतने ही वृद्ध प्रतीत होते थे।
कहा जाता है कि बाबा ने खेचरी मुद्रा जैसी दुर्लभ योगिक क्रियाओं में सिद्धि प्राप्त कर ली थी, जिससे वे अपनी श्वास और आयु पर नियंत्रण रख सकते थे। इसी कारण वे इतने लंबे समय तक जीवित रहे।

तपस्या और अलौकिक जीवन शैली

    मचान पर निवास: बाबा का जीवन अत्यंत सरल और तपस्वी था। वे किसी आश्रम या मठ में नहीं, बल्कि नदी किनारे एक साधारण से मचान पर रहते थे। चाहे कड़ाके की ठंड हो या भीषण गर्मी, वे हमेशा दिगंबर (वस्त्रहीन) अवस्था में रहते थे।
   निराहार तप: कई लोगों का मानना है कि बाबा वर्षों तक बिना कुछ खाए-पिए रहते थे। वे केवल सरयू या यमुना नदी का जल और कभी-कभी शहद या दूध का सेवन करते थे।
   पैर से आशीर्वाद: देवराहा बाबा की सबसे अनूठी बात थी उनका आशीर्वाद देने का तरीका। वे अपने मचान से ही अपने पैरों से भक्तों के सिर को छूकर आशीर्वाद देते थे, जो उनके भक्तों के लिए परम सौभाग्य का विषय होता था।

Devraha Baba (देवरहा बाबा) के चमत्कार और आशीर्वाद

Devaraha Baba, the mysterious saint of India, sitting in a meditative pose on a wooden Machan (platform) near the Yamuna river, surrounded by a spiritual forest atmosphere.

देवराहा बाबा के जीवन से जुड़े अनगिनत चमत्कारिक प्रसंग आज भी सुनाए जाते हैं।
   मन की बात जानना: कहा जाता है कि बाबा से कोई भी अपनी समस्या छिपा नहीं सकता था। वे बिना बताए ही भक्त के मन की बात जान लेते थे और उसका समाधान कर देते थे।
   वस्तुओं को प्रकट करना: कई भक्तों ने अनुभव किया कि बाबा शून्य से ही प्रसाद या अन्य वस्तुएं प्रकट कर देते थे।
   जल पर चलना: कुछ लोगों का मानना है कि उन्होंने बाबा को नदी के जल की सतह पर चलते हुए भी देखा था।
   एक साथ दो स्थानों पर उपस्थिति: ऐसे भी कई किस्से हैं जब बाबा एक ही समय में दो अलग-अलग स्थानों पर देखे गए।
ये चमत्कार उनकी योगिक शक्तियों और सिद्धियों का प्रमाण माने जाते हैं, जिसने उन्हें आम लोगों के बीच एक दैवीय संत के रूप में स्थापित किया।

राजनीति और Devraha Baba (देवरहा बाबा) का प्रभाव

देवराहा बाबा केवल आम जनता के लिए ही पूजनीय नहीं थे, बल्कि देश के बड़े-बड़े राजनेता भी उनका आशीर्वाद लेने आते थे।
 डॉ. राजेंद्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और लालू प्रसाद यादव जैसे कई दिग्गज नेता उनके दर्शन के लिए आया करते थे।
   एक प्रसिद्ध प्रसंग के अनुसार, आपातकाल के बाद जब इंदिरा गांधी चुनाव हार गईं और बहुत निराश थीं, तो वे बाबा के पास आशीर्वाद लेने गईं। बाबा ने अपने हाथ के पंजे से उन्हें आशीर्वाद दिया और कहा, "बच्ची, निराश मत हो, तुम्हारा समय आएगा।" इसके बाद ही कांग्रेस पार्टी ने "हाथ का पंजा" को अपना चुनाव चिन्ह बनाया और इंदिरा गांधी प्रचंड बहुमत से सत्ता में वापस लौटीं।

Devraha Baba (देवरहा बाबा) की मुख्य शिक्षाएं

बाबा ने कोई ग्रंथ नहीं लिखा और न ही कोई औपचारिक प्रवचन दिया। उनकी शिक्षाएं उनके आचरण और कुछ वाक्यों में ही निहित थीं।
   ईश्वर भक्ति: वे भगवान राम और कृष्ण के अनन्य भक्त थे। वे भक्तों को निरंतर ईश्वर का नाम जपने की सलाह देते थे।
   गौ-सेवा: बाबा गाय को माता मानते थे और गौ-सेवा को सबसे बड़ा धर्म बताते थे। वे कहते थे, "गाय की रक्षा करो, गाय तुम्हारी रक्षा करेगी।"
   सरल जीवन: उनका स्वयं का जीवन सादगी, त्याग और तपस्या का सबसे बड़ा उदाहरण था।
   निःस्वार्थ सेवा: वे हमेशा लोगों को गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा करने के लिए प्रेरित करते थे।

महासमाधि

देवराहा बाबा ने 19 जून 1990 को योगिनी एकादशी के दिन वृंदावन में यमुना के तट पर अपने शरीर का त्याग किया। उन्होंने अपनी महासमाधि की घोषणा पहले ही कर दी थी। आज भी वृंदावन में उनका समाधि स्थल और आश्रम भक्तों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है।

निष्कर्ष

देवराहा बाबा केवल एक संत नहीं, बल्कि एक जीवित किंवदंती थे। उनका जीवन योग, तपस्या और मानव सेवा का एक अनूठा संगम था। उनकी आयु का रहस्य भले ही कभी न सुलझ पाए, लेकिन उनकी शिक्षाएं, उनके चमत्कार और उनका आशीर्वाद आज भी लाखों लोगों के दिलों में जीवित है। वे इस बात का प्रमाण हैं कि सच्ची योगिक साधना के माध्यम से मनुष्य प्रकृति के नियमों से भी परे जा सकता है। देवराहा बाबा का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची आध्यात्मिकता आडंबर में नहीं, बल्कि सादगी और निःस्वार्थ प्रेम में निहित है।
देवराहा बाबा की जीवन गाथा केवल एक संत की कथा नहीं, बल्कि एक ऐसी आध्यात्मिक यात्रा है जो आत्मा को स्पर्श करती है और चेतना को जागृत करती है। उनके मौन में ब्रह्मांड की ध्वनि थी, और उनके आशीर्वाद में युगों का अनुभव। आज भी उनके नाम से श्रद्धा की ज्योति जलती है, जो seekers को भीतर की ओर देखने की प्रेरणा देती है।
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