कनकधारा स्तोत्र: दरिद्रता को जड़ से मिटाने और अपार धन प्राप्ति का अचूक दिव्य मंत्र
आज के भागदौड़ भरे जीवन में आर्थिक स्थिरता और सुख-समृद्धि की चाह हर किसी को होती है। कई बार कठिन परिश्रम के बाद भी फल नहीं मिलता और व्यक्ति कर्ज या दरिद्रता के जाल में फंसा रहता है। शास्त्रों में इस समस्या का सबसे प्रभावी और चमत्कारिक समाधान 'कनकधारा स्तोत्र' (Kanakadhara Stotram) को बताया गया है। माना जाता है कि यदि पूरी श्रद्धा के साथ इसका पाठ किया जाए, तो यह न केवल धन की कमी को दूर करता है, बल्कि घर में सुख-शांति और माता लक्ष्मी का स्थाई वास भी सुनिश्चित करता है। कनकधारा स्तोत्र की उत्पत्ति: एक चमत्कारिक कथा इस स्तोत्र की रचना आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी। कथा के अनुसार, जब शंकराचार्य एक निर्धन महिला के घर भिक्षा मांगने पहुंचे, तो उस महिला के पास देने के लिए केवल एक सूखा आंवला था। महिला की इस निस्वार्थ भावना और गरीबी को देख शंकराचार्य का हृदय पसीज गया। उन्होंने माता लक्ष्मी की स्तुति में तत्काल 'कनकधारा स्तोत्र' की रचना की। उनकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर माता लक्ष्मी ने उस घर में सोने के आंवलों की वर्षा कर दी। तभी से इसे 'कनकधारा' (सोने ...