Skip to main content

अयप्पा भगवान की दीक्षा - सबरीमाला

स्वामियों अय्यापो
स्वामी अय्यप्पा को दक्षिण भारत, खासकर केरल और तमिलनाडु में बहुत पूजा जाता है।
स्वामी अय्यप्पा को एक योगी और नायक के रूप में जाना जाता है। वे ब्रह्मचर्य, वीरता और ज्ञान के देवता माने जाते हैं।
स्वामी अय्यप्पा के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जिनमें से सबसे प्रसिद्ध सबरीमला मंदिर है, जो केरल के पश्चिमी घाटों में स्थित है।
हर साल लाखों श्रद्धालु सबरीमला की कठिन यात्रा करते हैं, जिसे 'अय्यप्पा व्रत' कहा जाता है।
यहाँ स्वामी अय्यप्पा से जुड़ी कुछ रोचक बातें हैं:
 * उनका जन्म पंचमी तिथि को हुआ था, इसलिए उन्हें 'पंचमी शिव' भी कहा जाता है।
 * उन्हें 'हरिहरपुत्र' भी कहा जाता है क्योंकि वे भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों के पुत्र हैं।
 * उन्हें 'अय्यप्पन' नाम इसलिए मिला क्योंकि वे 'अय्य' (पिता) और 'पप्पन' (बच्चा) दोनों हैं।
 * उन्हें 'शास्त्री' भी कहा जाता है क्योंकि वे ज्ञान के देवता हैं।
स्वामी अय्यप्पा के भक्त उन पर बहुत श्रद्धा रखते हैं और उनसे जीवन में सफलता और मोक्ष प्राप्ति की कामना करते हैं।
अयप्पा भगवान की दीक्षा Ayyappa Bhagwan Ki Diksha 
अयप्पा दीक्षा, दक्षिण भारत की एक परंपरा है। इसे केरल के सबरीमाला मंदिर जाने से पहले भगवान अयप्पा के भक्तों को 41 दिनों तक पालन करना होता है। इस दौरान भक्तों को ये नियम पालन करने होते हैं:
*काले कपड़े पहनना
*दाढ़ी-बाल नहीं कटवाना
*नंगे पैर रहना
*नॉनवेज नहीं खाना
*जमीन पर सोना
*ब्रह्मचर्य का पालन करना
*बुराई और प्रलोभनों से बचने के लिए हमेशा अपने साथ तुलसी का पत्ता रखना
*भगवान का भजन करना 
इस दौरान भक्तों को रिश्तों के मोह को छोड़कर ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है। इस दौरान भक्तों को बिना लहसुन/प्याज के केवल सात्विक भोजन करना होता है। जहाँ भी जाते हैं नंगे पैर चलते हैं। इस दौरान भक्तों को न तो किसी परफ्यूम का इस्तेमाल करना होता है और न ही शराब का सेवन।
अयप्पा दीक्षा को 'मंगलम' कहा जाता है। अयप्पा स्वामी को भगवान शिव और मोहिनी (भगवान विष्णु का रूप) का पुत्र माना गया है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान जब भगवान विष्णु ने मोहनी रूप धारण किया तब शिव जी उनपर मोहित हो गए और उनका वीर्यपात हो गया। इसके प्रभाव से स्वामी अयप्पा का जन्म हुआ। इसलिए अयप्पा देव को हरिहरन भी कहा जाता है। अय्यपा हिंदू देवता हैं। वे विकास के देवता माने जाते हैं और केरल में विशेष रूप से पूज्य हैं।
अयप्पा स्वामी किसके देवता है?
भगवान अयप्पा को सत्य और धार्मिकता का हिंदू देवता माना जाता है। उन्हें धर्मसस्थ और मणिकंदन के नाम से भी जाना जाता है। कुछ पुराणों में अयप्पा स्वामी को शास्ता का अवतार माना जाता है। अयप्पा की पूजा सबसे अधिक दक्षिण भारत में होती है। हालांकि इनके मंदिर देश के कई स्थानों पर हैं जो दक्षिण भारतीय शैली में ही निर्मित होते हैं। उन्हीं में से एक प्रमुख मंदिर है सबरीमाला।

Comments

Popular posts from this blog

परमानन्द जी महाराज का जीवन परिचय

सनातन धर्म सदैव से पूजनीय बना हुवा है क्युकी सनातन धर्म मानव जीवन को वो सिद्धांत प्रदान करता है जिनपे चलकर मानव अपने जीवन को शाश्त्रोक्त तरीके से जी सकता है। इसीकारण प्राचीनकाल से ही सम्पूर्ण BHARAT में ऋषि परंपरा चली आ रही है।  हिन्दू धर्म में ऋषियों को ईश्वर का प्रतिनिधि कहा जाता है।   जब हम पुराणों और वेदों का अध्ययन करते हैं तो हम पाते हैं कि जब-जब भगवान ने पृथ्वी पर अवतार धारण किया तब-तब उन्होंने स्पष्ट रूप से समाज को ये संदेश दिया कि संत समाज सदैव ही पूजनीय माना जाता है। आज हम उसी संत समाज में से एक ऐसे दिव्य महापुरुष के बारे में जानेंगे जिनके बारे में जितना भी कहा जाए उसमें कोई भी अतिशयोक्ति न होगी क्योंकि ये ऐसे दिव्य महापुरुष है जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानवता के नाम कर दिया।  परमानन्द जी महाराज का जीवन परिचय   स्वामी परमानंद जी महाराज सनातन धर्म और वेदांत वचनों और शास्त्रों के विश्वविख्यात ज्ञाता के रूप में आज संसार के प्रसिद्ध संतों में गिने जाते हैं। स्वामी परमानंद गिरि जी महाराज ने वेदांत वचन को एक सरल और साधारण भाषा के अंदर परिवर्तित कर जनमान...

Vishnu Shodasa Nama Stotram With Hindi Lyrics

विष्णु षोडश नाम स्तोत्रम् की उत्पत्ति   विष्णु षोडश नाम स्तोत्रम् भगवान विष्णु को समर्पित एक महामंत्र के रूप में जाना जाता है। सनातन धर्म में त्रिदेवो में भगवान श्री हरि विष्णु अर्थात भगवान नारायण एक विशेष स्थान रखते हैं। सभी प्राणियों को उनके कष्टों से मुक्ति पाने के लिए, उनकी इच्छाओ की पूर्ति के लिए भगवान विष्णु को समर्पित विष्णु षोडश नाम स्तोत्रम् का  प्रतिदिन पाठ करना चाहिए।  विष्णु षोडश नाम स्तोत्रम् भगवान् श्री हरी के 16 नमो को मिलकर बनाया गया एक महामंत्र है जिकी शक्ति अतुलनीय है। जो साधक प्रतिदिन स्तोत्र का जाप करता है, भगवान श्री विष्णु उस साधक के चारों तरफ अपना सुरक्षा कवच बना देते हैं। उस सुरक्षा कवच के कारण साधक के भोजन से उसकी औषधियां तक भगवान की कृपा से ओतप्रोत हो जाती है और साधक भगवान के संरक्षण को प्राप्त करता है। अतः विष्णु षोडश नाम स्तोत्रम को साधक को पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ जपना चाहिए क्योंकि नियमित रूप से साधक द्वारा पाठ करने से साधक के समस्त रोगो का नाश हो जाता है और साधक दीर्घायु को प्राप्त करता है।  Vishnu Shodasa Nama Sto...

Vishnu Apamarjana stotram | रोग मुक्ति अपामार्जन स्तोत्र

विष्णु स्तोत्र पाठ |  पद्म पुराण अपामार्जन स्तोत्र महिमा  संसार के समस्त रोगो का नाश करने में सक्षम दिव्या मंत्र जिसका उल्लेख पौराणिक धर्म ग्रंथो में मिलता है। अपामार्जन स्तोत्र भगवान् विष्णु का स्तोत्र है जिसका प्रयोग विषरोगादि के निवारण के लिए किया जाता है। इस स्तोत्र के नित्य गायन या पाठन से सभी प्रकार के रोग शरीर से दूर रहते हैं, तथा इसका प्रयोग रोगी व्यक्ति के मार्जन द्वारा रोग निराकरण में किया जाता है। भगवान नारायण स्वरूप अपामार्जन स्तोत्र को शक्ति स्वयं नारायण से प्राप्त होती है। अतः पौराणिक धर्म शास्त्रों में अपामार्जन स्तोत्र का उल्लेख दो बार प्राप्त होता है: प्रथम विष्णुधर्मोत्तरपुराण में तथा द्वितीय पद्म पुराण में ६वें स्कन्द का ७९वाँ अध्याय। जहाँ विष्णुधर्मोत्तरपुराण में पुलत्स्य मुनि ने दाल्भ्य के लिए कहा है वहीं पद्मपुराण में इसे भगवान् शिव ने माता पार्वती को सुनाया है। विष्णुधर्मोत्तरपुराण द्वारा प्रमाणित अपामार्जना स्तोत्र श्रीमान्वेंकटनाथार्यः कवितार्किककेसरी। वेदान्ताचार्यवर्यो मे सन्निधत्तां सदाहृदि॥ शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भजम्। प्रस...