Skip to main content

Prakriti -Swami Parmanand Ji Maharaj | प्रकृति - स्वामी परमानन्द जी महाराज

प्रकृति प्रतिक्षण बदल रही है। आने वाला पल अगले ही पल में बीता हुआ पल कहलाता है। यह संसार भी  प्रति पल-पल बदल रहा है क्योंकि यह संसार प्रकृति के अधीन है। समस्त सृष्टि इस प्रकृति की गोद से ही उत्पन्न हुई है। इसलिए हम सभी को प्रकृति का सम्मान करना चाहिए और प्रकृति के नियमों का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। 
प्रकृति ने हमें जितने भी प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध कराएं हैं हमें उन प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग कभी नहीं करना चाहिए अर्थात प्रकृति से हमें केवल उतना ही लेना चाहिए जितना हमारी आवश्यकता के अनुसार हो। पेड़ों की लकड़ियों के अलावा प्रकृति हमें बहुत सारे प्राकृतिक संसाधन प्रदान करती है जिसमें तेल, खनिज, धातु इत्यादि अलग प्रकार की वस्तुएं हैं। यह प्रकृति ही है जो हमें सांस लेने के लिए शुद्ध वायु प्रदान करती है पर क्या प्रकृति द्वारा प्राप्त समस्त संसाधनों का हमने सदुपयोग किया ?
ये एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर हम सबके पास है पर हममे से कोई भी इस प्रश्न का उत्तर देना नहीं चाहता। 
आज के भौतिक समाज की सत्यता केवल इतनी है की हमे जिससे जो चाहिए बस वो हमें प्राप्त हो जाये लेकिन बदले में हमसे किसी के लिए कुछ नहीं होता। 
प्रकृति के संसाधनों का उपयोग करने से हम सभी के ऊपर एक दायित्व आ जाता है कि हम सब प्रकृति में संतुलन बनाए रखने का प्रयास करते रहे। 
प्रकृति में संतुलन बनाए रखना कोई मुश्किल कार्य नहीं है अगर हम यह सोच ले तो प्रकृति हमेशा संतुलित रहेगी जिससे हमें बहुत सारे फायदे होंगे। सर्वप्रथम हम यह जानेंगे कि हमें प्रकृति में संतुलन कैसे बनाना है फिर हम यह जानेंगे कि उससे हमें क्या-क्या फायदे होंगे।
परम पूज्य Swami Parmanand Giri Ji Maharaj के श्रीमुख से हम सभी ने वेदांत ज्ञान की अमृत वाणी सुनी है। उन्ही के सदुपदेशों से हमसभी में प्रकृति को संतुलित बनाये रखने के लिए जो चेतना जागृत हुवी है उसका प्रकाश आप सभी  पहुंचने  है। 
प्राकृतिक संतुलन के उपाय :
(1 ) Tree Planting: हम सभी को वृक्षारोपण का नियम बनाना चाहिए।  "एक माह -एक वृक्ष " यदि हम सब एक माह में सिर्फ एक वृख लगाने का भी संकल्प कर ले तो ज़रा सोचिए की हम सब प्रकृति को कितनी आसानी से संतुलित कर लेंगे। 
जितनी Carbon dioxide हम बहार निकलते है वो समस्त दूषित वायु पेड़ो द्वारा शुद्ध वायु के रूप में परिवर्तित हो जाएगी और प्रदुषण भी कम हो जायेगा।
(2 )  Water is life : हम सभी को जल के महत्व को समझना होगा। जब तक हम जल के महत्व को नहीं समझेंगे तब तक स्वर्ण से भी अधिक महत्वपूर्ण और मूल्यवान इस जल को हम यूं ही बर्बाद करते रहेंगे।
हम सभी को याद रखना चाहिए की आपके पास चाहे कितना भी सोना और चांदी क्यों ना हो पर जब आपके तन को प्यास लगेगी तो आपकी वह प्यास केवल जल ही बुझा सकता है कोई सोना या चांदी का टुकड़ा नहीं। जल प्राकृतिक संसाधन है और सीमित मात्रा में उपलब्ध है। 
जल संकटआज विश्व के कई देशों में देखने को मिलता है। भारत के कई राज्यों के कई शहरों में जल की इतनी कमी है कि वहां रहने वाले स्थानीय लोगों को पेयजल प्राप्त करने के लिए कई किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है। 
अतः जल की कीमत को समझे और सदगुरुदेव स्वामी परमानन्द जी महाराज के चरणों में आज से संकल्प ले की हम जल को बर्बाद नहीं करेंगे।
(3 ) Limited use of vehicles: हम सभी को इस बात का संकल्प करना चाहिए कि हम वाहनों को अपनी आवश्यकता के अनुसार ही चलाएंगे। व्यर्थ में वाहनों में पेट्रोल और डीजल को डलवा--डलवा कर उन्हें व्यर्थ में चलाकर प्रदूषण नहीं फैलाएंगे क्योंकि आपके द्वारा जो वाहन चलाए जाते हैं उन से निकलने वाले धुएं से ग्लोबल वार्मिंग की समस्या उत्पन्न होती है जिससे प्रकृति के नियमों का उल्लंघन होता है। 
हम सभी को वाहन तो चलाना है लेकिन अपनी आवश्यकतानुसार। अगर हमारा कोई कार्य थोड़ी सी दूर पैदल चलने पर ही पूरा हो सकता है तो हमें उस कार्य के लिए वाहन का इस्तेमाल न करते हुए पदयात्रा ही करनी चाहिए। 

Comments

Popular posts from this blog

युगपुरुष महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि जी महाराज का जीवन परिचय (Biography)

सनातन धर्म की पुनर्स्थापना और संतों की भूमिका सनातन धर्म केवल एक धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है। भारत की इस पावन भूमि पर समय-समय पर ऐसी महान विभूतियों ने जन्म लिया है जिन्होंने समाज को नई दिशा दी है। परमानन्द जी महाराज एक ऐसी ही मशाल हैं जिन्होंने अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाया है। अध्याय 1: जन्म, बाल्यकाल और प्रारंभिक संस्कार (1935 - 1950) ​ विस्तृत विवरण: स्वामी जी का जन्म 26 अक्टूबर 1935 को उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के एक धर्मनिष्ठ परिवार में हुआ था। 30 के दशक का वह दौर भारत में वैचारिक क्रांति का दौर था। ​ पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनके परिवार के संस्कार और बचपन में देखे गए धार्मिक अनुष्ठानों का उन पर क्या प्रभाव पड़ा। ​ बाल्यकाल की अलौकिक घटनाएं: वे बचपन में अन्य बालकों से भिन्न कैसे थे? उनका झुकाव खेल-कूद के बजाय ध्यान और सत्संग की ओर कैसे बढ़ा? ​अध्याय 2: गुरु कृपा और सन्यास का संकल्प ​ चित्रकूट का आध्यात्मिक महत्व: जब हम परमानन्द जी महाराज के जीवन की बात करते हैं, तो स्वामी अखंडानंद जी महाराज का जिक्र अनिवार्य है। ​ प्रथम मिलन: चि...

Vishnu Shodasa Nama Stotram With Hindi Lyrics

विष्णु षोडश नाम स्तोत्रम् की उत्पत्ति   विष्णु षोडश नाम स्तोत्रम् भगवान विष्णु को समर्पित एक महामंत्र के रूप में जाना जाता है। सनातन धर्म में त्रिदेवो में भगवान श्री हरि विष्णु अर्थात भगवान नारायण एक विशेष स्थान रखते हैं। सभी प्राणियों को उनके कष्टों से मुक्ति पाने के लिए, उनकी इच्छाओ की पूर्ति के लिए भगवान विष्णु को समर्पित विष्णु षोडश नाम स्तोत्रम् का  प्रतिदिन पाठ करना चाहिए।  विष्णु षोडश नाम स्तोत्रम् भगवान् श्री हरी के 16 नमो को मिलकर बनाया गया एक महामंत्र है जिकी शक्ति अतुलनीय है। जो साधक प्रतिदिन स्तोत्र का जाप करता है, भगवान श्री विष्णु उस साधक के चारों तरफ अपना सुरक्षा कवच बना देते हैं। उस सुरक्षा कवच के कारण साधक के भोजन से उसकी औषधियां तक भगवान की कृपा से ओतप्रोत हो जाती है और साधक भगवान के संरक्षण को प्राप्त करता है। अतः विष्णु षोडश नाम स्तोत्रम को साधक को पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ जपना चाहिए क्योंकि नियमित रूप से साधक द्वारा पाठ करने से साधक के समस्त रोगो का नाश हो जाता है और साधक दीर्घायु को प्राप्त करता है।  Vishnu Shodasa Nama Sto...

विष्णु अपामार्जन स्तोत्र: दिव्य हीलिंग और असाध्य रोग मुक्ति का मार्ग (Vishnu Apamarjana stotram)

Vishnu Apamarjana Stotram केवल एक धार्मिक पाठ नहीं है, बल्कि यह प्राचीन भारतीय "ध्वनि चिकित्सा" ( Sound Therapy ) का एक अद्भुत उदाहरण है। पद्म पुराण और विष्णुधर्मोत्तर पुराण में वर्णित यह स्तोत्र मानसिक शांति, शारीरिक आरोग्य और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा के लिए विश्व प्रसिद्ध है। ​अपामार्जन स्तोत्र क्या है? (What is Apamarjana Stotram?) ​'अपामार्जन' का अर्थ है - मार्जन् करना या पोंछकर साफ करना। जिस प्रकार जल शरीर की बाहरी शुद्धि करता है, उसी प्रकार इस स्तोत्र की ध्वनियाँ हमारे सूक्ष्म शरीर (Subtle Body) से रोगों और नकारात्मक संस्कारों को 'मार्जन्' कर देती हैं। ​मूल स्रोत: यह स्तोत्र मुख्य रूप से दो पुराणों में मिलता है: ​विष्णुधर्मोत्तर पुराण: ऋषि पुलस्त्य और ऋषि दाल्भ्य का संवाद। ​पद्य पुराण: भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को बताया गया महात्म्य। ​इस स्तोत्र के मुख्य लाभ (Key Benefits for Global Wellness) ​आज के समय में जब पूरी दुनिया Holistic Healing की ओर बढ़ रही है, अपामार्जन स्तोत्र निम्नलिखित लाभ प्रदान करता है: ​शारीरिक स्वास्थ्य (Physical H...