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योग में सहजता और सरलता - स्वामी परमानन्द गिरी जी महाराज

प्राय देखा गया है की बहुत से साधक योग साधना के द्वारा अपनी कुण्डलिनी शक्ति को जागृत करने का प्रयास करते है पर कुछ त्रुटियों के कारण सफल नहीं हो पाते। स्वामी परमानन्द जी महाराज द्वारा बताये गए योग के सिद्ध्हांतो में से कुछ विशेष सिद्धांत यहाँ बताये गए है जिनका साधक को ज्ञान होना चाहिए। योग साधना करते हुए साधक को चाहिए कि वह अपने शरीर को सहज स्थिति में रहने दे अर्थात शरीर को जैसी स्थिति अच्छी लगती है ,शरीर स्वाभाविक जैसे अच्छा अनुभव करता है साधक को उसी आसान में बैठना चाहिए लेकिन सहजता का अर्थ यह नहीं की योग करते समय आप निंद्रा की अवस्था में हो जाएं। आपको सतत स्मरण रहे ,आप क्षण प्रतिक्षण जागृत रहे अर्थात आप पूर्ण जागृत अवस्था में रहे।  
योग में सहजता और सरलता - स्वामी परमानन्द गिरी जी महाराज
इस बात का ध्यान रखना चाहिए की जब कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है तो शरीर में विभिन्न प्रकार की क्रियाएं होने लगती हैं। भीतर जो होता है उसे सहजता से होने दे। उसमें आपकी समझ व संकोच बाधक नहीं होनी चाहिए। साधक सरल हृदय होना चाहिए। जिनका हृदय सरल होता है वह गुरु के पास बैठभर जाते हैं तो उनकी कुंडलिनी जागरण हो जाती है। ऐसा साधकअपने गुरु के उपदेश को ग्रहण करने में सक्षम होता है और अपनी कुंडलिनी शक्ति को जागृत कर अपनी आत्मा को परमात्मा के साथ मिलकर एकरूप होने की छमता प्राप्त कर लेता है। जो साधक योग में सहजता और सरलता रखता है उस साधक के लिए योग एक पके हुवे आम के तुल्य हो जाता है। 

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