परम पूज्य महामंडलेश्वर युगपुरुष स्वामी श्री परमानंद गिरि जी महाराज हम सभी को यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि अंधेरा प्रकाश से ही जाता है अर्थात अगर अंधेरे को हटाना है तो हमें प्रकाश करना पड़ेगा परंतु उस प्रकाश को करने के लिए हमें कौन-कौन से कार्य करने पड़ेंगे जिससे हमेशा के लिए एक शाश्वत प्रकाश हमारे मार्ग को प्रकाशित करता रहे। अंधकार से प्रकाश मनुष्य को जो भी कष्ट, जो भी पीड़ा होती है वह केवल इस शरीर के होने की वजह से है। अगर शरीर ना होता तो हमें कोई पीड़ा भी ना होती। जब तक शरीर है तब तक पीड़ा है जब शरीर ना होगा तो हमें पूर्ण आनंद होगा अर्थात हमें कभी भी मृत्यु से डरना नहीं चाहिए क्योंकि मृत्यु परमानंद तक प्राणी को पहुंचाती है अर्थात परमेश्वर में विलीन करके हमें ईश्वर के तत्व में समाहित कर जाती है। वेदांत वचनो के प्रकांड विद्वान महाराज श्री के अमृत वाणी से हम सभी के अंतर्मन में उठ रहे अनेको द्वंदों का छेदन होता रहा है और आज भी महाराज श्री यही करने का प्रयास कर रहे हैं। हमें पूर्ण आशा है कि उनके अमृत वचनों को सुनकर आप सभी के मन अर्थात हृदय के तमाम संशयो के जाल टूट ...
Discover the significance of Ekadashi, an important Hindu fasting day observed twice a month. Learn about its rituals, spiritual benefits, and cultural importance.