जब बात भारत के इतिहास की होती है तो अनेको ऐसी बाते खुल कर सामने आती है जिनको जानने के बाद हमे ये अहसास होता है की हमारे पूर्वज कितने ज्ञानी थे।सनातन धर्म की नींव रखने वाले हमारे पूर्वजों ने संसार की प्रगति के लिए जो योगदान दिया था उसे कभी नकारा नहीं जा सकता। आज हम ऐसे ही एक महान विद्वान की बात करेंगे जिन्होंने समस्त संसार में अपनी प्रतिभा से भारत के नाम का झंडा गाड़ दिया। आइए जानते हैं उस महान विद्वान आर्यभट के बारे में। गणितज्ञ आर्यभट Acharya Aryabhata आचार्य आर्यभट (476-550 ईस्वी) प्राचीन भारत के एक महान ज्योतिषविद् और गणितज्ञ थे। आर्यभट ने 'आर्यभटीय' नामक एक ग्रंथ लिखा था। इस ग्रंथ में उन्होंने ज्योतिषशास्त्र के कई सिद्धांतों का प्रतिपादन किया। आर्यभट ने अपने ग्रंथ में अपना जन्मस्थान कुसुमपुर और जन्मकाल शक संवत् 398 (476) लिखा है। आर्यभट ने नालंदा विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की थी। उन्होंने 23 साल की उम्र में ही 'आर्यभटीय' नामक ग्रंथ लिखा था। आर्यभट के शिष्य प्रसिद्ध खगोलविद वराह मिहिर थे। आर्यभट ने वर्गमूल निकालना, द्विघात समीकरणों को हल करना, और ग्रहण की भविष्...
Discover the significance of Ekadashi, an important Hindu fasting day observed twice a month. Learn about its rituals, spiritual benefits, and cultural importance.