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देवराहा बाबा: एक रहस्यमयी सिद्ध महायोगी की जीवन गाथा

Devraha Baba (देवरहा बाबा) : एक रहस्यमयी सिद्ध महायोगी की जीवन गाथा भारत की पावन धरा अनंत काल से ऋषि-मुनियों और सिद्ध योगियों की तपोस्थली रही है। इन्हीं महान विभूतियों में एक ऐसा नाम शामिल है, जिसके सामने समय की सीमाएं भी छोटी पड़ गईं— ब्रह्मर्षि देवराहा बाबा । यमुना के तट पर लकड़ी के ऊंचे मचान पर निवास करने वाले बाबा केवल एक संत नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक रहस्य थे। कहा जाता है कि उन्होंने कई सदियों तक जीवित रहकर योग की शक्ति से मृत्यु पर विजय प्राप्त की थी। आज के इस विशेष लेख में, हम ekadashi.org पर उस 'मचान वाले बाबा' की रहस्यमयी जीवन गाथा, उनके अद्भुत चमत्कार और उनकी दिव्य शिक्षाओं की गहराई में उतरेंगे। कौन थे  Devraha Baba (देवरहा बाबा) ? (Who was Devraha Baba?) देवराहा बाबा एक विश्व प्रसिद्ध भारतीय सिद्ध महायोगी थे, जो मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सलेमपुर तहसील के पास सरयू नदी के किनारे रहते थे। उनका वास्तविक नाम, जन्मतिथि और जन्म स्थान अज्ञात है। उन्होंने अपना अधिकांश जीवन एक लकड़ी के बने ऊँचे मचान पर बिताया, जो जमीन से लगभग 12-15 फीट ऊँचा होता था। वे इसी मच...

सत्य दर्शन क्या होता है Satya Darshan Kya Hota Hai | Swami Parmanand Ji Maharaj

सत्य का दर्शन हम सभी ने सदगुरुदेव Swami Parmanand Ji Maharaj के आशीर्वचनो में किया है। गुरुदेव ने वेदांत व्याख्या के माध्यम से हम सभी को सत्य के दर्शन कराने का प्रयास किया है।
हम सभी लोग जब किसी से वार्तालाप करते हैं तो किसी न किसी बात पर सत्य और असत्य अवश्य बोलते हैं। हम उसी को सत्य मान लेते है जो दिखता है परन्तु सत्य वो होता है जो दिखता ही नहीं। असत्य को सत्य समझने की भूल आज सारी मानव जाती कर रही है।  
जब हम कोई सत्कर्म करते है तब आपके मन में उनके प्रति कोई प्रश्न उत्पन्न नहीं होता की क्या आपने जो किया वह सही था या गलत। जैसे मंदिर के यदि दानपात्र में ₹1 डाला जाए तो उस एक रुपए के प्रति किसी के मन में कभी कोई शंका उत्पन्न नहीं होगी की ₹1 मंदिर के दानपात्र में डालकर हम ने सही किया या गलत। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारी अंतरात्मा जानती है कि हमने इस एक रुपए को किसी धर्म स्वरूप कार्य में लगाया है इसलिए हमारे मन में कोई प्रश्न उत्पन्न नहीं होता है। 

जब प्राणी कोई गलत कर्म करता है तो जीवात्मा स्वरुप परमेश्वर हमे सचेत करने के लिए हमारे मन में प्रश्न बनकर उत्पन्न हो प्रकट हो जाते है पर हम उनकी कभी नहीं सुनते क्योकि हमने सत्य को देखना ,समझना और बोलना कब का छोड दिया है। 
वास्तव में सत्य केवल वह होता है जो किसी भी कार्य को करते समय हमारी आत्मा, हमाराअंतर्मन हमसे बोलता है। जब हम किसी सत्कर्म को करते हैं तो संसार की समस्त सकारात्मक उर्जा Positive Energyउस कार्य को पूर्ण करने के लिए हमारे साथ लग जाती हैं।

Note: आप सभी भक्तो से अनुरोध है की ये आर्टिकल आपको कैसा लगा कृपया कमेंट बॉक्स में जरूर लिख कर बताये। जय गुरुदेव। 

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