Skip to main content

Posts

Showing posts from March, 2026

पापमोचनी एकादशी: व्रत कथा, महत्व और संपूर्ण पूजा विधि

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है, लेकिन पापमोचनी एकादशी का अपना एक विशिष्ट मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है—'पाप' को 'मोचन' (नष्ट) करने वाली एकादशी। यह व्रत न केवल धार्मिक पुण्य देता है, बल्कि मनुष्य को अपनी गलतियों का प्रायश्चित कर नए सिरे से जीवन शुरू करने की प्रेरणा भी देता है। पापमोचनी एकादशी का परिचय हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है। यह होली के बाद और चैत्र नवरात्रि (हिंदू नववर्ष) से ठीक पहले आती है। इस समय को 'संधि काल' माना जाता है, जहाँ हम बीते हुए समय की बुराइयों को त्याग कर नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ते हैं। पौराणिक व्रत कथा (Mahatmya Katha) भविष्योत्तर पुराण में इस एकादशी की महिमा का वर्णन मिलता है, जो मेधावी ऋषि और मंजुघोषा नामक अप्सरा से जुड़ी है: धर्मराज युधिष्ठिर बोले- हे भगवान! मैंने फाल्गुन माह की शुक्लपक्ष की एकादशी का माहात्म्य सुना अब आप चैत्र माह के कृष्णपक्ष की एकादशी के बारे में बतलाइये। इस एकादशी का नाम, इसमें कौन से देवता की पूजा की जा...