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Showing posts from April, 2022

देवी अर्गला स्तोत्र महात्म सहित | आदिशक्ति अर्गला स्तोत्र

|| देवी अर्गला स्तोत्रम्  महात्म्यं || || Argala Stotram Mahatma|| देवी अर्गला स्तोत्रम का पाठ माता आदिशक्ति अर्थात माता दुर्गा को समर्पित है। खास तौर पर नवरात्रि के दिनों में देवी अर्गला स्तोत्र का पाठ दुर्गा कवच के साथ किया जाता है। नवरात्रि के अलावा विशेष पर्व में या दुर्गा पूजन के समय भी देवी अर्गला स्तोत्र का पाठ किया जाता है जो कि मंगल दायक हो शुभ कारक सिद्ध होता है।  देवी अर्गला स्तोत्र का पाठ करके साधक देवी को प्रसन्न करने की क्षमतावां हो जाते हैं और देवी की अनुकंपा प्राप्त कर लेते हैं। देवी को प्रसन्न करने के लिए सबसे सरल अर्गला स्तोत्र सुप्रसिद्ध है। यह देवी महात्मा के अंतर्गत किया जाना वाला अत्यंत प्रभावकारी स्तोत्र पाठ कहलाता है।  अर्गला स्तोत्रम ॐ अस्यश्री अर्गला स्तोत्र मंत्रस्य विष्णुः ऋषिः। अनुष्टुप्छंदः। श्री महालक्षीर्देवता। मंत्रोदिता देव्योबीजं। नवार्णो मंत्र शक्तिः। श्री सप्तशती मंत्रस्तत्वं श्री जगदंदा प्रीत्यर्थे सप्तशती पठां गत्वेन जपे विनियोगः॥ ध्यानं ॐ बंधूक कुसुमाभासां पंचमुंडाधिवासिनीं। स्फुरच्चंद्रकलारत्न मुकुटां मुंडमालिनीं॥ त्रिनेत्रां रक्त ...

वरुथिनी एकादशी: सौभाग्य की रक्षक और पापों की विनाशिनी

वरुथिनी एकादशी वैशाख मास के कृष्ण पक्ष में आती है। 'वरुथिनी' शब्द संस्कृत के 'वरुथिन्' से बना है, जिसका अर्थ है— "कवच" या "रक्षक" । जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह पावन व्रत साधक के लिए एक आध्यात्मिक कवच का कार्य करता है, जो उसे हर प्रकार की बुराइयों से बचाता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। ​दिव्य महत्व और पौराणिक कथा ​भविष्य पुराण के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण और धर्मराज युधिष्ठिर के बीच इस एकादशी के महत्व पर गहरा संवाद हुआ है: ​ सौभाग्य का वरदान: श्रीकृष्ण बताते हैं कि यह एकादशी 'सौभाग्य' प्रदान करने वाली है। इस व्रत के प्रभाव से एक दुखियारी या अभागिनी स्त्री को भी सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ​ ऐतिहासिक उदाहरण: प्राचीन काल में राजा मान्धाता और राजा धुन्धुमार ने इसी वरुथिनी एकादशी का विधिवत व्रत करके स्वर्ग और परम पद प्राप्त किया था। ​ अतुलनीय तपस्या: इस एक दिन के उपवास का फल 10,000 वर्षों की कठिन तपस्या के समान माना गया है। ​ दान की महिमा: कुरुक्षेत्र में सूर्यग्रहण के समय एक मन स्वर्ण दान करने से जो पुण्य मिलता है, वही पुण्य ...