योगिनी एकादशी व्रत कथा: इस दुर्लभ कथा को पढ़ने से मिलते हैं 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने जितना पुण्य!
Yogini Ekadashi Vrat Katha & Mahatva in Hindi: आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) कहा जाता है। कुछ क्षेत्रों में इसे अपरा एकादशी (Apra Ekadashi) के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन विधि-विधान से व्रत रखता है और इसकी दुर्लभ कथा सुनता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे सीधे स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं भगवान श्री कृष्ण द्वारा धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई गई योगिनी एकादशी की वह पौराणिक और दुर्लभ कथा, जिसके साक्षी स्वयं पुराण भी हैं। योगिनी (अपरा) एकादशी का महत्व (Mahatva) सनातन धर्म में योगिनी एकादशी का विशेष महत्व है। भगवान श्रीकृष्ण के अनुसार: यह एकादशी तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। इस व्रत को करने से मनुष्य को इस लोक में दिव्य भोग और परलोक में मुक्ति मिलती है। सबसे बड़ा पुण्य: इस कथा को पढ़ने या सुनने का फल 88,000 (अट्ठासी सहस्त्र) ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर माना गया है। योगिनी एकादशी व्रत की दुर्लभ कथा (Yogini Ekadashi Vrat Katha) 1. कुबेर देव की पूजा और हेममा...