परमा एकादशी ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष एकादशी: भक्ति, शुद्धि और विष्णु कृपा का पावन पर्व भारतीय संस्कृति में एकादशी केवल कैलेंडर की एक तिथि नहीं, बल्कि आत्मसंयम, भक्ति और मन की शुद्धि का अवसर है। जब जीवन की उलझनें बढ़ती हैं, मन थकने लगता है और भीतर शांति की तलाश गहरी हो जाती है, तब एकादशी जैसे पावन व्रत हमें ईश्वर की ओर लौटने का सरल रास्ता दिखाते हैं। बहुत से लोग “परमा एकादशी ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष एकादशी” के नाम से इस तिथि की जानकारी खोजते हैं। हालांकि धार्मिक परंपराओं में ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अधिकतर अपरा एकादशी कहा गया है, जबकि परमा एकादशी अधिक मास से संबंधित मानी जाती है। Source Source फिर भी, भक्तिभाव में सबसे महत्वपूर्ण नाम नहीं, बल्कि भावना होती है। इसलिए इस लेख में हम इस पावन तिथि का महत्व, व्रत कथा, पूजा विधि, नियम, पारण और आध्यात्मिक संदेश बहुत सरल और आत्मीय भाषा में समझेंगे। परमा एकादशी ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष एकादशी क्या है एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को आती है और इसे भगवान विष्णु की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष मे...
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