सनातन धर्म के शास्त्रों और पुराणों में व्रतों की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है, किंतु इन सभी व्रतों में ' एकादशी ' को सबसे विशिष्ट और फलदायी माना गया है। एकादशी का व्रत न केवल मनुष्य के वर्तमान जीवन के कष्टों को दूर करता है, बल्कि उसके पूर्व जन्मों के पापों का शमन कर परलोक भी सुधार देता है। भगवान श्री हरि विष्णु को अत्यंत प्रिय होने के कारण, यह व्रत प्राणी मात्र के लिए स्वयं के साथ-साथ अपने कुल के उद्धार का एकमात्र सरल साधन है। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी, जिसे 'अपरा एकादशी' के नाम से जाना जाता है, अपने नाम के अनुरूप ही 'अपार' पुण्य देने वाली है। अपरा एकादशी का धार्मिक महत्व भगवान श्री कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को इस व्रत की महिमा बताते हुए कहा था कि जो मनुष्य अपरा एकादशी का विधि-विधान से पालन करते हैं, उन्हें संसार में प्रसिद्धि और सम्मान की प्राप्ति होती है। किन पापों से मिलती है मुक्ति? अपरा एकादशी के प्रभाव से मनुष्य को निम्नलिखित गंभीर दोषों से मुक्ति मिल सकती है: ब्रह्महत्या और पर-निंदा: इस व्रत के प्रभाव से ब्रह्महत्या और...
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