हिंदू धर्म में शनि देव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना गया है। वे व्यक्ति को उसके अच्छे और बुरे कर्मों के अनुसार फल देते हैं। ज्योतिष शास्त्र और सनातन परंपरा में दो अवसर ऐसे हैं, जो शनि देव की कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम माने गए हैं— शनि अमावस्या (Shani Amavasya) और शनि जयंती (Shani Jayanti) । यदि आपकी कुंडली में शनि दोष है, साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, या जीवन में लगातार परेशानियां आ रही हैं, तो इन विशेष दिनों पर की गई पूजा आपके सारे कष्टों को दूर कर सकती है। आइए जानते हैं शनि अमावस्या और शनि जयंती से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी। शनि अमावस्या और शनि जयंती में क्या अंतर है? अक्सर लोग इन दोनों तिथियों को लेकर असमंजस में रहते हैं। आइए इसे सरल शब्दों में समझते हैं: पर्व तिथि / समय महत्व शनि जयंती ज्येष्ठ मास की अमावस्या इस दिन सूर्य पुत्र शनि देव का जन्म हुआ था। यह साल में केवल एक बार आती है। शनि अमावस्या वर्ष की कोई भी अमावस्या जो शनिवार के दिन पड़े शनिवार के दिन अमावस्या तिथि का संयोग होने से यह 'शनि अमावस्या' या 'शनैश्चरी अमावस्या...
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